नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): एमएसपी पर गेहूं खरीद: रबी विपणन सीजन (RMS) 2026-27 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अप्रैल से जून तक चलने वाले खरीद अभियान के दौरान केंद्र सरकार ने 354.1 लाख टन गेहूं खरीद लिया है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। खास बात यह है कि सरकार ने इस सीजन के लिए 346 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा था, जिसे समय से पहले ही पार कर लिया गया।
देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में एमएसपी पर खरीद प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार खरीद न केवल लक्ष्य से अधिक रही है, बल्कि पिछले विपणन सीजन की तुलना में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एमएसपी: पिछले साल के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक खरीद
विपणन सीजन 2025-26 के दौरान सरकार ने किसानों से लगभग 300 लाख टन गेहूं की खरीद एमएसपी पर की थी। इसके मुकाबले चालू सीजन में खरीद करीब 18 प्रतिशत अधिक रही है। मंडियों में कुल 422.2 लाख टन गेहूं की आवक दर्ज की गई, जिसमें से बड़ी मात्रा में अनाज सरकारी एजेंसियों ने एमएसपी पर खरीदा।
सरकार का कहना है कि इस व्यापक खरीद अभियान का उद्देश्य केंद्रीय भंडार को मजबूत करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को अनाज की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
हालांकि, अब तक का सर्वकालिक रिकॉर्ड 2021-22 के रबी विपणन सीजन में बना था, जब किसानों से 433.3 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इसके बावजूद मौजूदा सीजन की खरीद पिछले चार वर्षों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन मानी जा रही है।
एमएसपी: किसानों को मिला 88,483 करोड़ रुपये का भुगतान
भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न राज्य सरकारों की खरीद एजेंसियों ने किसानों को एमएसपी के तहत अब तक 88,483 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इससे देशभर के लगभग 3.54 करोड़ किसानों को लाभ मिला है।
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों के किसानों को इस खरीद अभियान का सबसे अधिक फायदा हुआ है। सरकार का दावा है कि समयबद्ध भुगतान और व्यापक खरीद व्यवस्था के कारण किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला।
किन राज्यों का रहा सबसे बड़ा योगदान?
केंद्रीय गेहूं पूल में सबसे अधिक योगदान देने वाले राज्यों में पंजाब शीर्ष पर रहा है। इसके बाद मध्य प्रदेश और हरियाणा का स्थान है।
| राज्य | गेहूं खरीद (लाख टन में) |
|---|---|
| पंजाब | 121.6 |
| मध्य प्रदेश | 104.3 |
| हरियाणा | 81.2 |
| राजस्थान | 25.5 |
| उत्तर प्रदेश | 19.8 |
इन पांच राज्यों ने कुल खरीद में सबसे बड़ा योगदान दिया है और केंद्रीय भंडार को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
सुरक्षित स्तर से कहीं अधिक पहुंचा बफर स्टॉक
सरकार के बफर स्टॉक मानकों के अनुसार 1 जुलाई तक केंद्रीय पूल में 275.8 लाख टन गेहूं का भंडार होना आवश्यक है। लेकिन मौजूदा स्थिति में भारतीय खाद्य निगम के पास 512.4 लाख टन से अधिक गेहूं उपलब्ध है, जो निर्धारित मानक से काफी ज्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बफर स्टॉक भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट, मूल्य वृद्धि या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नियमित अनाज आपूर्ति बनाए रखने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मौसम की मार के बावजूद किसानों को राहत
इस वर्ष अप्रैल महीने में कई राज्यों में बेमौसम बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी। इससे किसानों को गुणवत्ता संबंधी नुकसान झेलना पड़ा। स्थिति को देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों को राहत प्रदान करते हुए खरीद मानकों में विशेष छूट दी।
सरकार ने गेहूं की चमक (Lustre Loss) में 70 प्रतिशत तक की कमी वाले अनाज की खरीद को मंजूरी दी। वहीं सिकुड़े और टूटे हुए दानों की स्वीकार्य सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।
इन रियायतों के चलते सरकारी एजेंसियों ने लगभग 240 लाख टन गेहूं विशेष छूट वाले मानकों के तहत खरीदा, जबकि 114.4 लाख टन गेहूं सामान्य और औसत गुणवत्ता श्रेणी का रहा।
खाद्य सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि एमएसपी पर रिकॉर्ड स्तर की गेहूं खरीद और मजबूत बफर स्टॉक से देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा। साथ ही किसानों को एमएसपी पर सुनिश्चित खरीद और समय पर भुगतान मिलने से कृषि क्षेत्र में सकारात्मक संदेश गया है। आने वाले महीनों में यह अतिरिक्त भंडार सार्वजनिक वितरण प्रणाली और बाजार स्थिरता दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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