नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा – करीब दस दिनों तक चले छात्र आंदोलन और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि उनका फैसला देश के छात्रों के भविष्य, राष्ट्रीय एकता और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। यह घटनाक्रम हाल के वर्षों में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर हुए सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक माना जा रहा है।
इस्तीफे में क्या कहा धर्मेंद्र प्रधान ने?
अपने सार्वजनिक संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से व्यथित किया है। उन्होंने कहा कि यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं, बल्कि देश की युवाशक्ति के भविष्य का प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में बनी परिस्थितियों का लाभ कोई राष्ट्रविरोधी तत्व न उठा सके, छात्र कानूनी विवादों में न उलझें और अपना पूरा ध्यान पढ़ाई तथा करियर पर लगा सकें, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।
छात्र आंदोलन की बड़ी जीत
पेपर लीक के खिलाफ चल रहे आंदोलन की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शामिल था। इस्तीफे की घोषणा के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और नेताओं ने इसे छात्रों की जीत बताया।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह साबित हो गया कि लोकतांत्रिक आंदोलन से जवाबदेही तय की जा सकती है। उन्होंने कहा, “कहा जाता था इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।”
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन में शामिल युवाओं और CJP को बधाई देते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
कांग्रेस ने बताया युवाओं की जीत
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के युवाओं और विशेष रूप से Gen Z की जीत है।
पार्टी ने कहा कि यह उन करोड़ों छात्रों की सफलता है जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

आंदोलन अभी खत्म नहीं
हालांकि मंत्री के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं।
अभिजीत दीपके ने कहा कि संगठन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं—
- परीक्षा विवाद और उससे जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न हो तथा 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी
सरकार अब सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार संसद में जल्द ही संशोधित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम से संबंधित विधेयक पेश किया जा सकता है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत—
| प्रस्तावित प्रावधान | सजा |
|---|---|
| पेपर लीक में शामिल व्यक्ति | न्यूनतम 5 वर्ष, अधिकतम 10 वर्ष की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माना |
| संगठित पेपर लीक गिरोह | कम से कम 7 वर्ष की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माना |
इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, संगठित परीक्षा माफिया पर कठोर कार्रवाई करना और छात्रों का भरोसा बहाल करना है।
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्र आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं केंद्र सरकार अब परीक्षा सुधारों और नए कानूनी प्रावधानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की चुनौती का सामना कर रही है।
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