[polylang_langswitcher]

Onion Procurement Price: प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद

Onion Price Crash

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Onion Procurement Price: केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादक किसानों को राहत देने के उद्देश्य से बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज के न्यूनतम खरीद मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार ने खरीद मूल्य को 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। संशोधित दर 13 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।

यह फैसला केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्याज खरीद अभियान की प्रगति, बाजार की स्थिति और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।

बाजार की स्थिति को देखते हुए लिया गया फैसला

Onion Procurement Price: सरकार के अनुसार खरीद मूल्य में यह संशोधन मंडियों में चल रही मौजूदा कीमतों और भंडारण योग्य प्याज की गुणवत्ता संबंधी मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है। मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार ने खरीद मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को अधिक लचीला और गतिशील बनाया है ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति में समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत हर साल प्याज का बफर स्टॉक तैयार किया जाता है।

Onion Procurement Price: इस सीजन में 2 लाख टन खरीद का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने चालू सीजन के लिए 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए खरीद अभियान 15 मई 2026 से शुरू हो चुका है। सरकारी एजेंसियां NAFED और NCCF किसानों से सीधे खरीद कर रही हैं।

पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने रिकॉर्ड 3 लाख टन प्याज की खरीद की थी। बफर स्टॉक का उपयोग आमतौर पर तब किया जाता है जब बाजार में कीमतों में अत्यधिक वृद्धि या कमी देखने को मिलती है। इससे उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलती है।

किसान संगठनों ने बढ़ोतरी को बताया अपर्याप्त

हालांकि सरकार के फैसले को राहत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र के कई किसान संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं।

किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में खेती की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। श्रम लागत, उर्वरक, बीज, सिंचाई और परिवहन खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत काफी ऊपर चली गई है। ऐसे में 16.50 रुपये प्रति किलो का खरीद मूल्य किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं दे पाएगा।

Onion Procurement Price: किसान संगठनों की मांग है कि सरकार कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल यानी 30 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की खरीद करे, ताकि किसानों को उनकी लागत के अनुरूप उचित लाभ मिल सके।

Onion Procurement Price
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें

उत्पादन में मामूली गिरावट का अनुमान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन उत्पादन की तुलना में मामूली रूप से कम है।

हालांकि उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं आई है, लेकिन मौसम संबंधी चुनौतियों और बढ़ती लागत के कारण किसानों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार कीमतों में सुधार नहीं होता और सरकारी खरीद सीमित रहती है, तो किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।

किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संतुलन की चुनौती

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं के लिए प्याज की कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। बफर स्टॉक नीति इसी संतुलन को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।

आने वाले महीनों में प्याज की बाजार कीमतों, सरकारी खरीद की गति और उत्पादन के अंतिम आंकड़ों पर नजर रहेगी। यदि बाजार में कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, तो सरकार खरीद मूल्य में आगे भी संशोधन कर सकती है।

====

इन ख़बरों को भी पढ़ें…

खरीफ 2026: जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद

ग्रामीण विकास को बड़ी ताकत: केंद्र ने राज्यों को जारी किए 95,692 करोड़ रुपये, नई योजना के सुचारू क्रियान्वयन पर जोर

GDP 7.7% बढ़ी, लेकिन कृषि क्षेत्र की रफ्तार धीमी; 2025-26 में ग्रोथ घटकर 3% पर पहुंची

मई 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतें रहीं लगभग स्थिर, अनाज और चीनी महंगी, वनस्पति तेल सस्ते

केला उत्पादकों पर TR4 फंगस का खतरा, 50,000 करोड़ रुपये की केला अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा संकट

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची