नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खरीफ बुवाई 2026: देश के अधिकांश हिस्सों में पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई अच्छी बारिश का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर साफ दिखाई देने लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 700.47 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 6 प्रतिशत कम है, लेकिन एक सप्ताह पहले यह अंतर 16 प्रतिशत से अधिक था। इससे स्पष्ट है कि मानसून की सक्रियता के साथ किसानों ने बुवाई में तेजी दिखाई है।
खरीफ बुवाई 2026: सबसे उल्लेखनीय सुधार धान की रोपाई में देखने को मिला है, जिसका रकबा अब लगभग पिछले वर्ष के बराबर पहुंच गया है। हालांकि दलहन, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई में अभी भी कमी बनी हुई है।
खरीफ बुवाई 2026: धान की रोपाई ने तेजी से भरी कमी
धान की रोपाई 166.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 167.83 लाख हेक्टेयर था। यानी अब अंतर केवल 0.84 प्रतिशत रह गया है। गौरतलब है कि 10 जुलाई तक धान का रकबा पिछले वर्ष से 8.64 प्रतिशत कम था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सामान्य बना रहता है, तो धान की बुवाई पिछले वर्ष के स्तर को पार कर सकती है। पिछले खरीफ सीजन में धान की खेती 446.70 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जबकि पिछले पांच वर्षों का औसत लगभग 412 लाख हेक्टेयर रहा है।
दलहन में सुधार, लेकिन पिछड़ापन बरकरार
दलहन की बुवाई में भी पिछले सप्ताह की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन यह अब भी पिछले वर्ष से काफी पीछे है। 17 जुलाई तक दलहन का रकबा 69.23 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 81.52 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। यानी दलहन का क्षेत्र अभी भी 12.29 लाख हेक्टेयर (करीब 15 प्रतिशत) कम है।
खरीफ बुवाई 2026: फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो:
| फसल | 17 जुलाई 2026 (लाख हे.) | 17 जुलाई 2025 (लाख हे.) |
|---|---|---|
| अरहर | 24.80 | 30.17 |
| उड़द | 13.51 | 14.36 |
| मूंग | 23.98 | 26.94 |
अरहर की बुवाई में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है, जबकि उड़द और मूंग भी पिछले वर्ष के स्तर तक नहीं पहुंच सके हैं।
खरीफ बुवाई 2026: मोटे अनाज की बुवाई भी पिछड़ी
मोटे अनाजों की बुवाई 119.03 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 134.09 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। हालांकि पिछले सप्ताह की तुलना में अंतर काफी घटा है, फिर भी यह अभी 15.06 लाख हेक्टेयर (करीब 11 प्रतिशत) कम है।

बाजरा, ज्वार और मक्का तीनों प्रमुख फसलों में पिछले वर्ष की तुलना में कमी बनी हुई है।
- बाजरा: 39.98 लाख हेक्टेयर (पिछले वर्ष 49.06 लाख हेक्टेयर)
- मक्का: 67.89 लाख हेक्टेयर (पिछले वर्ष 71.50 लाख हेक्टेयर)
- ज्वार: 8.74 लाख हेक्टेयर (पिछले वर्ष 9.99 लाख हेक्टेयर)
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताहों में यदि पर्याप्त वर्षा होती है, तो इन फसलों का रकबा भी तेजी से बढ़ सकता है।
खरीफ बुवाई 2026: तिलहन में सोयाबीन अब भी पीछे
तिलहन फसलों की कुल बुवाई 147.09 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक यह 155.72 लाख हेक्टेयर थी। यानी तिलहन का रकबा अभी भी 8.63 लाख हेक्टेयर (करीब 5.5 प्रतिशत) कम है।
सबसे बड़ी तिलहन फसल सोयाबीन की बुवाई 106.02 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 111.05 लाख हेक्टेयर से कम है। वहीं मूंगफली और तिल का क्षेत्र भी घटा है। हालांकि सूरजमुखी की खेती में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है।
कपास में भी कमी, गन्ना स्थिर
नकदी फसलों में कपास की बुवाई 92.53 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 98.40 लाख हेक्टेयर थी। यानी कपास का रकबा करीब 6 प्रतिशत कम है। हालांकि एक सप्ताह पहले यह अंतर 15 प्रतिशत से अधिक था, जिससे स्पष्ट है कि बुवाई की रफ्तार में सुधार आया है।
दूसरी ओर, गन्ने का रकबा 57.58 लाख हेक्टेयर पर स्थिर बना हुआ है, जबकि जूट एवं मेस्ता की खेती पिछले वर्ष की तुलना में मामूली बढ़त के साथ 6.32 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है।
आगे मानसून पर रहेगी नजर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खरीफ सीजन (खरीफ बुवाई 2026) अभी अपने शुरुआती चरण में है और अधिकांश राज्यों में बुवाई का महत्वपूर्ण समय शेष है। हालिया बारिश ने किसानों को राहत दी है और धान की बुवाई लगभग पिछले वर्ष के स्तर तक पहुंच गई है। हालांकि दलहन, मोटे अनाज, तिलहन और कपास की बुवाई में आई कमी को पूरी तरह दूर करने के लिए आगामी सप्ताहों में मानसून की निरंतर सक्रियता आवश्यक होगी।
खरीफ बुवाई 2026: यदि वर्षा सामान्य बनी रहती है, तो खरीफ सीजन के अंत तक अधिकांश प्रमुख फसलों का रकबा पिछले वर्ष के करीब पहुंच सकता है, जिससे उत्पादन और खाद्य सुरक्षा की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
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