मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में नई खरीफ कपास की आवक शुरू हो गई है, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें फिलहाल अंतरराष्ट्रीय रुझान से अलग दिशा में बनी हुई हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में नई कपास बाजार में पहुंचने लगी है। शुरुआती आवक के बीच कई मंडियों में कच्चे कपास के भाव केंद्र सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर हैं।
रायचूर, बेल्लारी, आदोनी और येम्मिगनूर जैसे प्रमुख बाजारों में कच्चे कपास का भाव करीब ₹9,200-9,500 प्रति क्विंटल बताया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक कीमत कपास में मौजूद नमी और उसकी गुणवत्ता के आधार पर तय हो रही है।
MSP से ऊपर बने रह सकते हैं कपास के भाव
केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का MSP ₹8,267 प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास का MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया है। दोनों श्रेणियों के MSP में पिछले सीजन के मुकाबले ₹557 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
इस लिहाज से मौजूदा रायचूर क्षेत्र के भाव मध्यम रेशे वाली कपास के MSP से लगभग ₹933-1,233 प्रति क्विंटल ऊपर हैं। बाजार से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी के बावजूद घरेलू आपूर्ति सीमित रहने तक कपास के भाव MSP से ऊपर बने रह सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास नरम
घरेलू बाजार की मजबूती ऐसे समय में है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ICE कॉटन फ्यूचर्स करीब 87 सेंट प्रति पाउंड के आसपास है, जो हाल में देखे गए करीब 93 सेंट के स्तर से नीचे है। 4 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फ्रंट-मंथ ICE कॉटन फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक कीमतों में गिरावट का असर भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खरीद भाव पर भी पड़ा है। कारोबारियों के मुताबिक, कुछ कंपनियों ने अपने कपास खरीद भाव में करीब ₹2,000 प्रति कैंडी (356 किलो) की कटौती की है। हालांकि, भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपने भाव में फिलहाल बदलाव नहीं किया है।
दिलचस्प बात यह है कि कम कीमत की पेशकश के बावजूद खरीदारों की ओर से उत्साह नहीं दिख रहा है। इसकी बड़ी वजह घरेलू कपड़ा उद्योग में यार्न की कमजोर मांग है।
यार्न की मांग कमजोर, मिलों के पास पुराना स्टॉक
कपास से यार्न बनाने वाली मिलें इस समय सावधानी से खरीदारी कर रही हैं। यार्न बाजार में मांग कमजोर रहने के कारण ऊंचे भाव पर तैयार सूत की बिक्री मुश्किल हो रही है। इसके अलावा कई मिलों के पास पहले से पर्याप्त कपास स्टॉक मौजूद है।
ऐसे में मिलें नई फसल की आक्रामक खरीदारी करने के बजाय मौजूदा स्टॉक और बाजार के अगले रुख का इंतजार कर रही हैं। इससे किसानों को मिल रहे अपेक्षाकृत ऊंचे भाव और मिलों की कमजोर खरीदारी के बीच बाजार में एक तरह का अंतर दिखाई दे रहा है।
गुजरात में भी नई कपास की आवक
गुजरात के कुछ हिस्सों में भी नई कपास की छोटी मात्रा में आवक शुरू हो गई है। राजकोट क्षेत्र के कारोबारियों के मुताबिक, कपास का भाव करीब ₹1,900-2,000 प्रति मन (20 किलो) है।
इस साल कपास की बुवाई में देरी के कारण नई फसल की आवक भी सामान्य समय से करीब एक महीने पीछे चल रही है। फिलहाल देशभर में नई कपास की साप्ताहिक आवक करीब 50,000 गांठ है, जिसमें एक गांठ का वजन लगभग 170 किलो माना जाता है।
नवंबर की शुरुआत से आवक में तेजी आने की उम्मीद है। अगले दो सप्ताह में साप्ताहिक आवक बढ़कर करीब 1 लाख गांठ तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है तो घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर कुछ दबाव बन सकता है।
बारिश पर टिकी फसल की आगे की तस्वीर
नई फसल के लिए आने वाले दिनों की मौसम स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। गुजरात समेत कुछ उत्पादक क्षेत्रों में कपास की फसल को इस समय अच्छी बारिश की जरूरत है। अगले कुछ दिनों में बारिश होने से फसल की पैदावार और गुणवत्ता को फायदा मिल सकता है।
कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 109.17 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 109.87 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल अब तक कपास का क्षेत्रफल लगभग 0.7 प्रतिशत कम है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
कपास बाजार के लिए अगले कुछ सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे। एक तरफ नई फसल की आवक बढ़ने से घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी, वहीं दूसरी तरफ कमजोर यार्न मांग मिलों की खरीदारी को सीमित कर सकती है। दूसरी ओर, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में और गिरावट आती है तो भारतीय कपास पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल किसानों के लिए तस्वीर अपेक्षाकृत सकारात्मक है क्योंकि शुरुआती मंडियों में भाव MSP से ऊपर हैं। लेकिन नवंबर में आवक के तेज होने और घरेलू यार्न मांग के रुख से यह तय होगा कि मौजूदा ऊंचे भाव कितने समय तक टिकते हैं।
=====
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें
=====
Sugar Crisis: नेपाल में चीनी के लिए हाहाकार! 120 रुपये किलो पहुंची कीमत, भारत से मंगाने की तैयारी
यूरिया की कीमतों में बड़ी राहत; किसानों को मिल सकती है राहत
Sugar Price: चीनी मिलों पर कृत्रिम कमी पैदा करने का आरोप
Rice Trade: चीन ने 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द
मध्य प्रदेश के किसानों ने खत्म किया आंदोलन, राज्य सरकार ने मानी मांगें