Sugar Price – चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार सख्त
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Price: देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी के बीच खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने चीनी मिलों को कड़ा निर्देश जारी किया है। 14 अगस्त 2026 को जारी पत्र में चीनी मिलों को बिक्री के सात दिनों के भीतर खरीदारों को चीनी का स्टॉक उठाने/डिस्पैच करने को कहा गया है। सरकार ने चेतावनी दी है कि स्टॉक में गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित मिलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विभाग के अनुसार हालिया फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कुछ चीनी मिलों के पास उनके द्वारा घोषित मात्रा से अधिक स्टॉक पाया गया। सरकार ने यह भी पाया कि कुछ मिलें महीने की शुरुआत में चीनी बेच रही थीं, लेकिन खरीदारों को उसका डिस्पैच या लिफ्टिंग महीने के अंत तक होने दे रही थीं। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है और चीनी की कीमतों में सट्टेबाजी को बढ़ावा मिल सकता है।
बिक्री के 7 दिन के भीतर डिस्पैच जरूरी
नए निर्देश के मुताबिक किसी डीलर, एजेंट या बल्क कंज्यूमर को चीनी बेचने के बाद मिल अपने परिसर में उस स्टॉक को सात दिन से अधिक समय तक नहीं रख सकती, सिवाय ऐसी परिस्थितियों के जो उसके नियंत्रण से बाहर हों।
सरकार ने कहा है कि केंद्रीय और राज्य सरकारों की टीमें चीनी मिलों में स्टॉक की जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन जारी रखेंगी। अगर घोषित स्टॉक और वास्तविक स्टॉक में विसंगति मिलती है या निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो कार्रवाई की जा सकती है। यह निर्देश 30 नवंबर 2026 तक लागू रहने वाला है।
यह कार्रवाई Sugar (Control) Order, 2025 के तहत की जा सकती है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर यह आदेश उपलब्ध है। विभाग के मुताबिक यह नया नियामकीय ढांचा चीनी क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है।
Sugar Price: डेढ़ महीने में चीनी के दाम में तेज उछाल
सरकार की चिंता की बड़ी वजह घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई तेजी है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार, एक्स-फैक्टरी कीमत जुलाई की शुरुआत में करीब ₹4,200 प्रति क्विंटल से बढ़कर अगस्त के दूसरे सप्ताह में ₹4,800 प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गई। खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमत (sugar price) करीब ₹55-60 प्रति किलो तक पहुंचने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इस बीच सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक की जांच तेज कर दी है। फिजिकल वेरिफिकेशन में मिले अंतर को देखते हुए मिलों को अपने स्टॉक और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड सही रखने तथा बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

चीनी उत्पादन में कमी ने बढ़ाई चुनौती
कीमतों पर दबाव की दूसरी बड़ी वजह मौजूदा सीजन में उत्पादन में कमी है। उद्योग के शुरुआती अनुमान में 2025-26 सीजन में चीनी उत्पादन करीब 309 लाख टन रहने का अनुमान था, लेकिन उत्पादन लगभग 279 लाख टन तक रहने की बात सामने आई है। यह आंकड़ा देश की करीब 285 लाख टन की सालाना खपत के आसपास है।
कम उत्पादन और घटते स्टॉक को लेकर सरकार की चिंता ऐसे समय बढ़ी है जब अक्टूबर से नया पेराई सीजन शुरू होना है। Reuters ने हाल में रिपोर्ट किया था कि सरकार अगले सीजन में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर नीतिगत बदलावों पर विचार कर रही है, ताकि चीनी उत्पादन बढ़ाया जा सके और कीमतों पर दबाव कम हो। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा सीजन में करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट हुई है।
अक्टूबर में बनने वाली चीनी की बिक्री को लेकर भी निर्देश
कम स्टॉक को देखते हुए चीनी मिलों की ओर से आगामी पेराई सीजन जल्दी शुरू करने की मांग भी सामने आई है। 14 अगस्त के पत्र में विभाग ने कहा है कि अक्टूबर 2026 में उत्पादन शुरू करने वाली मिलें अक्टूबर में उत्पादित चीनी की बिक्री अक्टूबर और नवंबर के दौरान कर सकेंगी। इसका उद्देश्य नए उत्पादन को बाजार में जल्द उपलब्ध कराना है।
त्योहारों से पहले सरकार के सामने बड़ी चुनौती
Sugar Price: आने वाले महीनों में त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सरकार के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती होगी।
मौजूदा स्थिति में सरकार का फोकस तीन स्तरों पर दिखाई दे रहा है—स्टॉक की निगरानी, बिक्री के बाद समय पर डिस्पैच और आगामी सीजन में उत्पादन बढ़ाना। वहीं, चीनी मिलों के घोषित और वास्तविक स्टॉक में अंतर की जांच भी जारी रहेगी।
सरकार के ताजा निर्देश का मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। हालांकि, कीमतों में स्थायी राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि मौजूदा स्टॉक कितना उपलब्ध है, नया सीजन कितनी जल्दी शुरू होता है और आगामी महीनों में घरेलू उत्पादन कितना रहता है।
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