नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन (RMS) 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹25 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹2,610 कर दिया है। पिछले रबी सीजन में गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल था। यानी इस बार वृद्धि करीब 0.97 प्रतिशत बैठती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 30 सितंबर 2026 को छह प्रमुख रबी फसलों के नए MSP को मंजूरी दी।
गेहूं की तुलना में दूसरी रबी फसलों में ज्यादा बढ़ोतरी
सरकार के फैसले में गेहूं के मुकाबले दलहन और तिलहन की कुछ फसलों के MSP में काफी अधिक वृद्धि की गई है। जौ का MSP ₹136, चने का ₹83, मसूर का ₹390, रेपसीड एवं सरसों का ₹413 और कुसुम का ₹675 प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है। कुसुम के MSP में सबसे अधिक वृद्धि हुई है और नया MSP ₹7,215 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
| फसल | 2026-27 MSP | 2027-28 MSP | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| गेहूं | ₹2,585 | ₹2,610 | ₹25 |
| जौ | ₹2,150 | ₹2,286 | ₹136 |
| चना | ₹5,875 | ₹5,958 | ₹83 |
| मसूर | ₹7,000 | ₹7,390 | ₹390 |
| रेपसीड-सरसों | ₹6,200 | ₹6,613 | ₹413 |
| कुसुम | ₹6,540 | ₹7,215 | ₹675 |
सरकार ने लागत पर 106% मार्जिन का दावा किया
केंद्र सरकार के अनुसार, गेहूं का 2027-28 के लिए अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का अनुमान ₹1,264 प्रति क्विंटल है। ₹2,610 के MSP को इस लागत से तुलना करने पर सरकार ने 106 प्रतिशत का मार्जिन बताया है। सरकार का कहना है कि MSP निर्धारण 2018-19 के बजट में घोषित उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना स्तर पर रखने का सिद्धांत अपनाया गया है।
हालांकि, किसान संगठनों की आपत्ति MSP की गणना में इस्तेमाल होने वाली लागत की अवधारणा को लेकर है। किसान संगठन लंबे समय से C2+50% फॉर्मूले के आधार पर MSP तय करने की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि व्यापक लागत में जमीन, पूंजी और अन्य संबंधित खर्चों को शामिल किया जाना चाहिए।
किसान संगठनों ने उठाए लागत और महंगाई पर सवाल
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने MSP घोषणा के साथ उत्पादन लागत और महंगाई से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने गेहूं के MSP में 0.96 प्रतिशत की वृद्धि को किसानों की बढ़ती लागत के संदर्भ में अपर्याप्त बताया और गेहूं की उत्पादन लागत के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की।
पंजाब में किसान संगठनों ने भी ₹25 की वृद्धि पर असंतोष जताया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेताओं ने MSP को व्यापक उत्पादन लागत के 50 प्रतिशत ऊपर तय करने की मांग दोहराई है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी हाल में MSP और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कृषि नीति की आलोचना कर चुके हैं। सितंबर 2026 में चंडीगढ़ में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने MSP समेत किसानों की मांगों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की बात कही थी।
ऐतिहासिक संदर्भ में कहां खड़ी है यह बढ़ोतरी?
गेहूं MSP की ऐतिहासिक श्रृंखला देखें तो 2003-04 के लिए MSP ₹630 था और 2004-05 के लिए यह ₹640 हुआ था। इसलिए 2004-05 में वृद्धि शून्य होने का दावा सही नहीं है। वहीं 2010-11 के लिए MSP ₹1,100 हुआ, जो पिछले वर्ष के ₹1,080 से करीब 1.85 प्रतिशत अधिक था। आधिकारिक ऐतिहासिक आंकड़ों में 2007-08 से 2008-09 के बीच गेहूं MSP ₹850 से बढ़कर ₹1,000 हुआ था, यानी करीब 17.65 प्रतिशत की वृद्धि।
इस लिहाज से मौजूदा 0.97 प्रतिशत की वृद्धि हाल के दशकों में बेहद कम वार्षिक बढ़ोतरी में शामिल है, लेकिन इसे “2004-05 के बाद सबसे कम” बताते समय अलग-अलग फसल वर्ष और विपणन वर्ष की गणना को स्पष्ट करना जरूरी है।
MSP पर सरकार और किसान संगठनों के बीच अंतर
केंद्र सरकार जहां उत्पादन लागत के मुकाबले MSP पर पर्याप्त मार्जिन और खरीद व्यवस्था को अपनी नीति का आधार बता रही है, वहीं किसान संगठन लागत की गणना के तरीके, महंगाई और वास्तविक खेती खर्च को लेकर अलग सवाल उठा रहे हैं। सरकार के अनुसार, 2027-28 की नई दरों के तहत छह रबी फसलों की अनुमानित खरीद 324 लाख टन और किसानों को लगभग ₹90,962 करोड़ के भुगतान का अनुमान है।
ऐसे में गेहूं MSP की ₹25 की बढ़ोतरी का विवाद केवल कीमत तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल है कि किसान की उत्पादन लागत किस पद्धति से मापी जाए और MSP में लाभ का आकलन किस लागत आधार पर किया जाए। यही मुद्दा आने वाले रबी सीजन में किसान संगठनों और सरकार के बीच बहस का प्रमुख आधार बना रह सकता है।
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