मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): Drought Crisis: दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की शुरुआत के साथ ही दक्षिण और मध्य भारत के बड़े हिस्से में सूखे का संकट गहराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, चालू मानसूनी सीजन में देश भर में बारिश की कुल कमी 15 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह कमी सबसे भयावह 28 प्रतिशत तक पहुंच गई है। बारिश की इस भारी गिरावट ने फसलों के व्यापक नुकसान, ग्रामीण आय में गिरावट, पशुओं के लिए चारे के संकट और ग्रामीण रोजगार को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
Drought Crisis: देश भर में बारिश की स्थिति, IMD का आकलन
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। मानसून की वापसी के समय तक देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का क्षेत्रीय वितरण काफी असमान रहा है।
| क्षेत्र | बारिश में दर्ज कमी (%) | प्रमुख प्रभावित राज्य |
| दक्षिणी प्रायद्वीप | 28% कमी | आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु |
| पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत | 26% कमी | बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, असम, पूर्वोत्तर राज्य |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 9% कमी | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान |
| मध्य भारत | 5% कमी | महाराष्ट्र के बड़े हिस्से |
| अखिल भारतीय स्तर | 15% कमी | संपूर्ण देश |
आंध्र प्रदेश: CPI(M) की राष्ट्रीय आपदा पैकेज और 7.5 लाख मुआवजे की मांग
Drought Crisis: आंध्र प्रदेश में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने राज्य सरकार से सूखा प्रभावित मंडलों की तत्काल घोषणा करने और प्रभावित किसानों व पट्टेदार (टैलेंट) किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। विजयवाड़ा में एक संवाददाताओं सम्मेलन को संबोधित करते हुए CPI(M) के राज्य सचिव वी. श्रीनिवास राव ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव से राज्य में स्थिति काफी बिगड़ी है।
पार्टी के अनुसार, राज्य में लगभग 50 लाख एकड़ में खरीफ फसलों की बुआई हुई थी, लेकिन जल संकट के कारण 20 लाख एकड़ में भी पैदावार होने की उम्मीद नहीं है। CPI(M) और किसान संगठनों ने मांग की है कि:
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केंद्र सरकार इस संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे और 1 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज दे।
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प्रत्येक प्रभावित पट्टेदार किसान परिवार को 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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किसानों का कृषि ऋण माफ किया जाए और मनरेगा के तहत प्रतिदिन 2,310 रुपये मजदूरी के साथ 200 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाए।
कर्नाटक: 140 वर्षों का सबसे गंभीर सूखा, 28 सितंबर को उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
Drought Crisis: कर्नाटक में स्थिति को राज्य सरकार ने पिछले 140 वर्षों में सबसे गंभीर सूखा करार दिया है। बेंगलुरु में शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र के बीच किसान संगठन ‘कर्नाटक राज्य रैयत संघ’ (KRRS) ने सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मैसूरु में KRRS नेता बी. नागेंद्र ने चेतावनी दी कि यदि विशेष सत्र में सूखे से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 28 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में उपायुक्त (DC) कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से 50:50 के अनुपात में कृषि ऋण माफ करने, बैंकों द्वारा कर्ज वसूली पर तुरंत रोक लगाने और सिंचाई पंप सेटों के लिए कम से कम 7 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी है।

महाराष्ट्र: शरद पवार ने मांगी ₹50,000 प्रति हेक्टेयर राहत, अकोला में प्रदर्शन
Drought Crisis: महाराष्ट्र में भी सूखे की मार झेल रहे किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से प्रभावित तालुकों में तत्काल सूखा घोषित करने की अपील की है। पवार ने पीड़ित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा प्रत्येक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार को 25,000 रुपये की सीधी वित्तीय सहायता देने की मांग की है।
इस बीच, अकोला जिले में विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन किसानों को पुलिस ने उस समय हिरासत में ले लिया जब वे कम बारिश के कारण बर्बाद हुई सोयाबीन की फसल लेकर राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने को सौंपने पहुंचे थे। किसानों का कहना है कि आधिकारिक औपचारिकताओं के इंतजार के बजाय सरकार को तुरंत राहत कार्य शुरू करने चाहिए।
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