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यूपी स्टेट लाइवस्टॉक मिशन को मंजूरी, देसी गाय खरीदने पर ₹40 हजार अनुदान; बीमा प्रीमियम का 85% देगी सरकार

लखनऊ (कृषि भूमि ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए पशुधन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने की तैयारी है। राज्य सरकार के स्टेट लाइवस्टॉक मिशन के तहत देसी गाय खरीदने वाले पात्र किसानों को प्रति गाय 40 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रस्ताव बताया गया है। एक किसान को अधिकतम दो गायों की खरीद पर सहायता मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा पशुधन बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 15 प्रतिशत राशि पशुपालक को देनी होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें पशुपालन, किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और जल परिवहन से जुड़े फैसले शामिल हैं।

पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, राज्य सरकार पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनाने पर जोर दे रही है। पशुपालन में कम उत्पादकता, बाजार तक सीमित पहुंच और दूध सहित पशु उत्पादों के मूल्य संवर्धन की कमी जैसी समस्याएं हैं। प्रस्तावित स्टेट लाइवस्टॉक मिशन के जरिए इन चुनौतियों से निपटने की योजना है।

इस पहल का उद्देश्य पशु उत्पादकता बढ़ाने के साथ उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करना है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को खेती के साथ आय का दूसरा स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

दो देसी गायों तक मिल सकता है अनुदान

प्रस्ताव के मुताबिक, पात्र किसान को देसी गाय खरीदने पर प्रति गाय 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। अधिकतम दो गायों के लिए अनुदान मिलने पर एक किसान को कुल 80 हजार रुपये तक की सहायता मिल सकती है।

यह सहायता देसी नस्लों के पालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता, गाय की नस्ल, खरीद की प्रक्रिया, आवेदन के दस्तावेज और अनुदान जारी करने की शर्तों की आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी होगा।

पशुपालकों के लिए बीमा सहायता भी इस पहल का अहम हिस्सा है। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी द्वारा वहन किए जाने से पशुओं की मृत्यु या अन्य बीमित जोखिमों की स्थिति में परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।

कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार की योजना

मिशन के तहत कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। दिए गए विवरण के अनुसार, जिन गायों से फिलहाल दो से तीन लीटर दूध मिलता है, उनकी उत्पादकता बढ़ाकर 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, यह लक्ष्य सभी गायों के लिए सुनिश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता। दूध उत्पादन नस्ल, पशु के स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन क्षमता, देखभाल और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए बेहतर नस्ल के साथ संतुलित आहार, हरे चारे की उपलब्धता और नियमित पशु चिकित्सा सेवाएं भी जरूरी होंगी।

मुर्गी, बकरी और भेड़ पालन को भी मिलेगा बढ़ावा

स्टेट लाइवस्टॉक मिशन का दायरा केवल गाय और डेयरी उत्पादन तक सीमित नहीं बताया गया है। इसके तहत मुर्गी, बकरी और भेड़ पालन को भी प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे उन ग्रामीण परिवारों को अवसर मिल सकता है जिनके पास बड़े पशु खरीदने या डेयरी कारोबार शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।

इन गतिविधियों को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं, चारे की उपलब्धता, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव महत्वपूर्ण होंगे। पशुपालन आधारित छोटे उद्यमों को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा मिलने से रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

11 नदियों पर जल परिवहन व्यवस्थित करने की तैयारी

कैबिनेट से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में जल परिवहन को व्यवस्थित करने के लिए नावों और जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी की भूमिका निर्धारित की जाएगी।

इंजन से चलने वाले बड़े जहाजों को यांत्रिक श्रेणी में रखा जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली छोटी मोटर चालित नावों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जाएगी। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित बताया गया है। गंगा और यमुना सहित 11 नदियों पर जल परिवहन से संबंधित कार्य किए जाने की बात भी कही गई है।

योजना के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

पशुपालन और जल परिवहन से जुड़े प्रस्तावों का वास्तविक लाभ उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। किसानों के लिए अनुदान की स्पष्ट पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, समय पर भुगतान और बीमा दावों का पारदर्शी निपटारा महत्वपूर्ण होगा। इसी तरह पशुपालकों को बेहतर नस्ल, चारा, पशु चिकित्सा और बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

यदि इन व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय में योगदान देने के साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा दे सकता है।

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