नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): त्योहारी सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू बाजार में कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की समयसीमा दो महीने बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। इससे आयातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी खरीदने और निर्धारित कोटे के तहत भारत लाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 19 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से इस संबंध में संशोधन किया। इससे पहले आयात की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। सरकार के इस फैसले से आयात की निर्धारित मात्रा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। शुल्क-मुक्त आयात की अधिकतम सीमा 10 लाख टन ही रहेगी।
अब तक कितना हुआ कच्ची चीनी का आयात?
सरकार ने 20 अगस्त 2026 को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना था।
हालांकि, उद्योग जगत से मिले आंकड़ों के अनुसार, अनुमति मिलने के बावजूद अब तक करीब 2.6 लाख टन चीनी का ही आयात हुआ है। इस तरह निर्धारित कोटे का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है।
आयात की धीमी रफ्तार के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों का अंतर प्रमुख कारण माना जा रहा है। यदि विदेश से चीनी खरीदने, परिवहन और प्रसंस्करण की कुल लागत घरेलू बाजार में उपलब्ध कीमतों के मुकाबले अधिक होती है, तो आयात कारोबारियों के लिए कम आकर्षक हो जाता है।
समयसीमा बढ़ने से कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और उपलब्धता के अनुसार खरीदारी की योजना बनाने का अधिक अवसर मिलेगा।
चीनी उत्पादन का अनुमान 343 से घटकर 306 लाख टन
देश में चीनी उत्पादन के अनुमान में आई गिरावट भी सरकार की चिंता का प्रमुख कारण है। विपणन वर्ष 2025-26 के लिए शुरुआती उत्पादन अनुमान 343 लाख टन लगाया गया था, जिसे बाद में घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया।
यह शुरुआती अनुमान की तुलना में 37 लाख टन कम है। यानी अनुमानित उत्पादन में करीब 10.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने पहले भी कम उत्पादन, मौसम संबंधी नुकसान और त्योहारी मांग को चीनी बाजार में कीमतों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल किया था।
दूसरी ओर, देश में चीनी की सालाना खपत लगभग 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन का अनुमान घरेलू खपत से अधिक होने के बावजूद उपलब्ध शुरुआती स्टॉक, मौसमी मांग और आगामी आपूर्ति को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सरकार आयात के विकल्प को खुला रखकर बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
टैरिफ रेट कोटा क्या है?
टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत निर्धारित मात्रा में किसी वस्तु का आयात विशेष शुल्क शर्तों के साथ किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में पात्र आयातकों को अधिकतम 10 लाख टन कच्ची चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी गई है।
नई अधिसूचना के तहत इस सुविधा की समयसीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है। हालांकि, आयातकों को पहले से निर्धारित अन्य नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। यह विस्तार अपने आप में अतिरिक्त 10 लाख टन आयात की अनुमति नहीं है, बल्कि मौजूदा कोटे का इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त समय देता है।
जमाखोरी रोकने और कीमतों पर निगरानी की तैयारी
चीनी की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार आयात नीति के साथ घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर भी नजर रख रही है। जमाखोरी और कृत्रिम कमी की आशंका को कम करने के लिए स्टॉक सीमा तथा अन्य निगरानी उपायों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में चीनी की कमी नहीं होने देना और उपभोक्ताओं को कीमतों में अचानक उछाल से बचाना है।
हालांकि, आयात की समयसीमा बढ़ाने से चीनी की खुदरा कीमतों में तत्काल गिरावट की गारंटी नहीं मिलती। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित कोटे के तहत कितनी चीनी आयात होती है, उसकी लागत कितनी रहती है और घरेलू बाजार में मांग एवं आपूर्ति की स्थिति कैसी रहती है।
फिलहाल सरकार का यह कदम चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संभावित आपूर्ति दबाव से निपटने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में आयात की रफ्तार और घरेलू बाजार में कीमतों का रुझान इस फैसले के प्रभाव को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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