नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Prices: चालू पेराई सीजन 2025-26 में चीनी उत्पादन के अनुमान बिगड़ने के बाद कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Sugar Prices – कीमतों को नियंत्रित रखने के तमाम प्रयासों के बावजूद अपेक्षित परिणाम न मिलने पर, खाद्य मंत्रालय के सचिव ने देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के अधिकारियों और चीनी उद्योग के प्रमुख संगठनों के साथ मंगलवार को एक अहम बैठक की। यह बैठक काफी गरमा-गरमी वाली रही, जिसमें सरकार ने साफ कर दिया कि उद्योग को कीमतों को व्यावहारिक स्तर पर बनाए रखने में पूरा सहयोग करना होगा।
यूपी और महाराष्ट्र के दामों में भारी अंतर पर चिंता
Sugar Prices: हाल ही में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के चीनी एक्स-मिल दामों में बड़ा अंतर देखने को मिला था। सामान्यतः दोनों राज्यों के बीच करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर रहता है, जो बढ़कर 700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। महाराष्ट्र में जहां एक्स-मिल दाम 4,400 रुपये थे, वहीं उत्तर प्रदेश में यह 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक चले गए थे। त्योहारी सीजन से ठीक पहले आई इस स्थिति ने मंत्रालय को हरकत में ला दिया। वर्तमान में दोनों राज्यों में एक्स-मिल दाम लगभग समान स्तर पर करीब 4,800 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं।
Sugar Prices: बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे
खाद्य मंत्रालय की इस उच्चस्तरीय बैठक में निजी चीनी मिलों के संगठन ‘इस्मा’ (ISMA) और सहकारी चीनी मिलों के संगठन ‘एनएफसीएसएफ’ (NFCSF) के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के चीनी आयुक्तों ने भी बैठक में हिस्सा लिया और मौजूदा बाजार स्थितियों पर मंथन किया।
सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए मिलों को 15 अक्टूबर, 2026 से पेराई शुरू करने का निर्देश दिया है। हालांकि, महाराष्ट्र में इसे मुख्यमंत्री की मंजूरी मिल गई है, लेकिन उद्योग सूत्रों का मानना है कि दशहरा या दिवाली के आसपास ही मिलें पूरी तरह चालू हो पाएंगी। इसके अलावा, आगामी सीजन में एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन को लेकर भी स्थिति जनवरी तक साफ होने की उम्मीद है। खुदरा बाजार में चीनी अभी भी 62-65 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है, जिससे संकेत मिलते हैं कि सरकार और उद्योग के बीच बैठकों का यह दौर अभी आगे भी जारी रहेगा।
Sugar Prices: चीनी बाजार का भविष्य और आगामी चुनौतियां
चीनी उद्योग के जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में घरेलू बाजार की चाल गन्ने की अगली फसल के उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुख पर काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि मौसम के मिजाज या कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होती है, तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और चीनी मिलों दोनों के लिए कीमतों में संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहारी और शादियों के सीजन के दौरान आम उपभोक्ताओं को उचित दरों पर चीनी मिलती रहे, साथ ही किसानों को समय पर उनके बकाए का भुगतान और मिलों को उनकी उत्पादन लागत का वाजिब रिटर्न भी मिलता रहे।