नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खरीफ बुवाई: देश में खरीफ फसलों की बुवाई अब अंतिम चरण में पहुंच रही है, लेकिन कुल रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अभी भी थोड़ा पीछे है। 21 अगस्त 2026 तक देश में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1,056.70 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह पिछले साल की समान अवधि के 1,072.77 लाख हेक्टेयर की तुलना में 16.07 लाख हेक्टेयर यानी 1.50 फीसदी कम है।
हालांकि, शुरुआती महीनों में दर्ज बड़ी कमी के मुकाबले यह अंतर काफी कम हुआ है। कृषि मंत्रालय के पिछले आंकड़ों में भी जुलाई के दौरान खरीफ बुवाई में सुधार का रुझान दिखाई दिया था। 14 अगस्त तक कुल खरीफ रकबा पिछले वर्ष से कम था, लेकिन बारिश में सुधार के साथ बुवाई की गति बढ़ी।
धान का रकबा 3.15 फीसदी घटा
खरीफ की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान की बुवाई में अभी भी कमी बनी हुई है। 21 अगस्त तक धान का रकबा 405.10 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 418.29 लाख हेक्टेयर था। यानी धान का रकबा 13.19 लाख हेक्टेयर या 3.15 फीसदी कम है।
फिर भी मौजूदा रकबा 412 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र के काफी करीब है। धान की बुवाई में कमी का एक प्रमुख कारण मानसून की असमान प्रगति और विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का अलग-अलग वितरण रहा है। जुलाई में सरकार ने भी कमजोर मानसून और वर्षा की कमी वाले जिलों की स्थिति की समीक्षा की थी।
खरीफ बुवाई: दलहन ने दिखाई मजबूती
दलहन क्षेत्र खरीफ सीजन की तस्वीर को कुछ हद तक संतुलित करता नजर आ रहा है। 21 अगस्त तक दलहन का कुल रकबा 113.63 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 112.14 लाख हेक्टेयर से 1.33 फीसदी अधिक है।
अरहर की बुवाई 43.86 लाख हेक्टेयर, उड़द 24.38 लाख हेक्टेयर और मूंग 32.68 लाख हेक्टेयर रही। उड़द में सबसे उल्लेखनीय सुधार हुआ और इसका रकबा पिछले साल से 12.22 फीसदी बढ़ा। अरहर में भी 0.97 फीसदी वृद्धि हुई, जबकि मूंग का रकबा 3.67 फीसदी घटा।
खरीफ बुवाई: मक्का और रागी में बड़ी गिरावट
श्री अन्न और मोटे अनाजों का कुल रकबा 176.36 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 179.81 लाख हेक्टेयर से 1.92 फीसदी कम है।
मक्का का रकबा 89.51 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 93.30 लाख हेक्टेयर था। यानी इसमें 4.06 फीसदी की कमी आई। रागी में गिरावट और अधिक तेज रही। इसका रकबा 6.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 4.81 लाख हेक्टेयर रह गया, जो 27.14 फीसदी कम है। दूसरी ओर, ज्वार में 6.41 फीसदी और बाजरे में 2.13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
तिलहन लगभग स्थिर, सोयाबीन में मामूली कमी
तिलहन का कुल रकबा 188.37 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 188.69 लाख हेक्टेयर से महज 0.17 फीसदी कम है। मूंगफली में 1.18 फीसदी और तिल में 15.16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
छोटे आधार वाली फसलों में सूरजमुखी का रकबा 80.98 फीसदी और नाइजरसीड का 48.94 फीसदी बढ़ा। इसके विपरीत सोयाबीन में 1.15 फीसदी और अरंडी में 20.80 फीसदी की कमी रही।
21 अगस्त तक प्रमुख खरीफ फसलों की स्थिति
| फसल समूह | 2026 रकबा | पिछले वर्ष | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कुल खरीफ | 1,056.70 लाख हे. | 1,072.77 लाख हे. | -1.50% |
| धान | 405.10 लाख हे. | 418.29 लाख हे. | -3.15% |
| दलहन | 113.63 लाख हे. | 112.14 लाख हे. | +1.33% |
| मोटे अनाज | 176.36 लाख हे. | 179.81 लाख हे. | -1.92% |
| तिलहन | 188.37 लाख हे. | 188.69 लाख हे. | -0.17% |
| कपास | 108.45 लाख हे. | 108.73 लाख हे. | -0.26% |
| गन्ना | 58.44 लाख हे. | 58.87 लाख हे. | -0.73% |
बारिश की कमी अभी भी चुनौती
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 21 अगस्त 2026 तक देश में संचयी मानसूनी बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही। क्षेत्रीय स्तर पर भी बारिश का वितरण असमान रहा, जिसका असर फसलवार बुवाई पर पड़ा है। IMD के 21 अगस्त के आंकड़े देश और क्षेत्रवार वर्षा की स्थिति को लगातार मॉनिटर किए जाने की पुष्टि करते हैं।
कुल मिलाकर, खरीफ बुवाई में पिछड़ने का अंतर अब केवल 1.50 फीसदी रह गया है, जो सीजन के शुरुआती दौर की तुलना में सुधार का संकेत है। हालांकि धान, मक्का और रागी में कमी चिंता का विषय बनी हुई है। इसके मुकाबले दलहन में बढ़त और तिलहन का लगभग स्थिर रकबा खरीफ क्षेत्र को सहारा दे रहा है। आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और बची हुई बुवाई की गति यह तय करेगी कि अंतिम रकबा पिछले साल के स्तर के कितने करीब पहुंचता है।

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