मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने 2026 के वैश्विक अनाज उत्पादन अनुमान में 34 लाख टन की कटौती की है। 4 सितंबर को जारी ताजा Cereal Supply and Demand Brief के मुताबिक, अब 2026 में दुनिया का कुल अनाज उत्पादन करीब 2,980 मिलियन टन यानी 298 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह 2025 की तुलना में 6.11 करोड़ टन या 2 प्रतिशत कम है। हालांकि, इसके बावजूद 2026 की फसल अब भी इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी वैश्विक अनाज फसल रहने की संभावना है।
FAO के अनुसार, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मक्का उत्पादन की कमजोर संभावनाएं हैं। यूरोप के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में लगातार गर्म और शुष्क मौसम ने फसल की स्थिति को प्रभावित किया है। खास तौर पर फ्रांस और पोलैंड में पैदावार पांच साल के औसत से नीचे रहने का अनुमान है।
मक्का उत्पादन में गिरावट, यूरोप सबसे बड़ी चिंता
FAO ने 2026 के वैश्विक मक्का उत्पादन का अनुमान 1,309 मिलियन टन किया है। यह जून के अनुमान से 0.6 प्रतिशत कम है। यूरोपीय संघ में खराब मौसम के अलावा भारत और पराग्वे के उत्पादन अनुमानों में भी मामूली कटौती की गई है।
हालांकि, दक्षिण अमेरिका से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। अर्जेंटीना और ब्राजील में बेहतर पैदावार के अनुमान ने वैश्विक गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया है। FAO के मुताबिक, इन दोनों देशों में मक्का उत्पादन 2026 में औसत से ऊपर रह सकता है।
गेहूं के अनुमान में सुधार, लेकिन उत्पादन फिर भी घटेगा
मक्का के विपरीत गेहूं उत्पादन का वैश्विक अनुमान बढ़ाया गया है। FAO ने 2026 के गेहूं उत्पादन का अनुमान 4.2 मिलियन टन यानी 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 810.7 मिलियन टन कर दिया है। इसके बावजूद यह 2025 के स्तर से 3.8 प्रतिशत कम रहेगा।
कनाडा और मोरक्को में बेहतर पैदावार की उम्मीद ने अनुमान को ऊपर किया है। रूस और यूक्रेन के उत्पादन अनुमानों में भी सुधार हुआ है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन में कम बारिश और अत्यधिक गर्मी के कारण उत्पादन पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक अनाज उत्पादन: चावल पर भी दबाव
2026-27 में वैश्विक चावल उत्पादन 553.1 मिलियन टन (मिल्ड आधार) रहने का अनुमान है। यह 2025-26 के संशोधित स्तर से 1.9 प्रतिशत कम है। FAO ने इसके पीछे उत्पादकों के कमजोर मार्जिन और अल नीनो से जुड़ी प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है।
हालांकि, चावल की वैश्विक खपत बढ़ने का अनुमान है। FAO के अनुसार 2026-27 में चावल का कुल उपयोग 559.0 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो पिछले सीजन से 0.5 प्रतिशत अधिक होगा। आबादी बढ़ने के साथ खाद्य खपत में वृद्धि इसकी प्रमुख वजह है।
अनाज भंडार में 1.07 करोड़ टन की कटौती
वैश्विक आपूर्ति को लेकर एक और महत्वपूर्ण संकेत अनाज भंडार से मिला है। FAO ने 2026-27 सीजन के अंत में वैश्विक अनाज भंडार का अनुमान जुलाई के मुकाबले 10.7 मिलियन टन घटाकर 947.2 मिलियन टन कर दिया है। इसके बावजूद यह शुरुआती भंडार से मामूली रूप से अधिक रहेगा।
वैश्विक अनाज स्टॉक-टू-यूज अनुपात 31.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले सीजन के 31.9 प्रतिशत से कम है। FAO का आकलन है कि ऐतिहासिक नजरिये से यह स्तर अभी भी अपेक्षाकृत आरामदायक वैश्विक आपूर्ति की ओर इशारा करता है।
वैश्विक अनाज व्यापार में मामूली बढ़ोतरी
FAO ने 2026-27 में वैश्विक अनाज व्यापार का अनुमान 509.3 मिलियन टन किया है, जो जुलाई के अनुमान से 1.7 मिलियन टन अधिक है। इस संशोधन में मक्का व्यापार की बेहतर संभावनाओं की अहम भूमिका है। अमेरिका के दुनिया के सबसे बड़े मक्का निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने की उम्मीद है, जबकि अर्जेंटीना का मक्का निर्यात करीब 39 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।
फिर भी वैश्विक व्यापार 2025-26 के रिकॉर्ड स्तर से नीचे रहने की संभावना है। खासकर ब्लैक सी क्षेत्र से रूस और यूक्रेन के अनाज निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। शिपिंग परिस्थितियों, लॉजिस्टिक्स और वैकल्पिक निर्यात मार्गों की सीमित क्षमता से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
FAO ने 2026 के अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार का अनुमान भी बढ़ाकर 60.5 मिलियन टन किया है। हालांकि, यह 2025 के रिकॉर्ड स्तर से 1.9 प्रतिशत कम रहेगा, क्योंकि एशिया और अफ्रीका में आयात मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान है।
कुल मिलाकर, FAO का ताजा आकलन बताता है कि वैश्विक अनाज बाजार में तत्काल आपूर्ति संकट जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन अत्यधिक गर्मी, सूखा, अल नीनो और ब्लैक सी क्षेत्र की व्यापारिक अनिश्चितता आने वाले महीनों में कीमतों और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। सितंबर की रिपोर्ट में उत्पादन का स्तर ऐतिहासिक रूप से ऊंचा रहने के बावजूद लगातार घटते अनुमान यह संकेत देते हैं कि मौसम संबंधी जोखिम वैश्विक कृषि बाजार पर तेजी से असर डाल रहे हैं।
स्रोत: FAO Cereal Supply and Demand Brief (FAOHome)
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