नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत के अचानक ढहने के बाद राजधानी में छात्र आवासों और अनधिकृत निर्माण की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इमारत में छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) आवास चल रहा था। राहत और बचाव अभियान के बाद अब जांच का फोकस इस बात पर है कि आखिर करीब पांच दशक पुरानी बताई जा रही संरचना में ऐसी कौन-कौन सी कमियां थीं, जिनके बावजूद उसमें छात्रों को ठहराया जा रहा था।
MCD की शुरुआती जांच में सामने आईं गंभीर खामियां
MCD की रिपोर्ट के मुताबिक गिरी हुई इमारत की पहचान P-14, सत्य निकेतन के रूप में हुई है। करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार मंजिलें थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इसका निर्माण 1990 के दशक में हुआ था। खास बात यह है कि MCD के रिकॉर्ड में इस संपत्ति की बुकिंग या सीलिंग का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला और न ही वहां किसी निर्माण कार्य को लेकर पहले कोई शिकायत दर्ज थी।
लेकिन शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत के लिए कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं था। MCD अधिकारियों के अनुसार बेसमेंट में किया गया निर्माण या बदलाव भी कथित तौर पर अनधिकृत था। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ऐसी पुनर्वास कॉलोनियों में मूल रूप से सीमित ऊंचाई वाले निर्माण की अनुमति थी, जबकि गिरी हुई इमारत में ग्राउंड के ऊपर चार मंजिलें थीं।
पहले दिखीं दरारें, फिर भरभराकर गिरी इमारत
स्थानीय लोगों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, हादसे से पहले इमारत में दरारें दिखाई दे रही थीं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति के बारे में पहले से कोई जानकारी थी या नहीं और अगर थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इमारत में मरम्मत या बदलाव का काम भी चलने की बात सामने आई है। शुरुआती पुलिस जांच में ग्राउंड फ्लोर पर काम होने की बात कही गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में बेसमेंट में निर्माण कार्य और पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस हिस्से में किस तरह का काम चल रहा था और उसका संरचना की स्थिरता पर कितना असर पड़ा।
फायर NOC पर भी उठे सवाल
हादसे के बाद केवल स्ट्रक्चरल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि फायर सेफ्टी को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही इस इमारत के पास जरूरी फायर NOC नहीं था। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि छात्रों के लिए इस्तेमाल हो रही इमारत में आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
सत्य निकेतन लंबे समय से दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच PG और निजी हॉस्टल के लिए लोकप्रिय इलाका रहा है। ऐसे में एक पुरानी रिहायशी संरचना का बड़े पैमाने पर छात्र आवास में बदलना और उसमें अतिरिक्त निर्माण होना नियामकीय निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
बगल की इमारत भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को खाली कराया है। मलबा हटाने के दौरान आसपास की संरचनाओं पर दबाव पड़ने की आशंका को देखते हुए राहत और बचाव अभियान सावधानी से चलाया गया।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले छात्र इलाकों में कितनी इमारतों का इस्तेमाल मूल स्वीकृति से अलग तरीके से किया जा रहा है और उनमें नियमित स्ट्रक्चरल या फायर सेफ्टी जांच कितनी बार होती है।
चार मंजिल से ज्यादा वाले अवैध निर्माण सील होंगे
हादसे के बाद MCD ने बड़ा फैसला लेते हुए चार मंजिल से अधिक वाले सभी अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने का आदेश दिया है। नगर निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसे निर्माणों की अनुमति देने या उन्हें नजरअंदाज करने वाले अधिकारी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें तत्काल बर्खास्तगी तक शामिल है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में अनधिकृत निर्माण और पुराने मकानों को PG में बदलने की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
FIR दर्ज, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
दिल्ली पुलिस ने कथित मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ दक्षिण कैंपस थाने में FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है और जांच जारी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इमारत की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति क्या थी, निर्माण या मरम्मत में कौन से नियमों का उल्लंघन हुआ, PG के संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं और निगरानी के स्तर पर कहीं चूक तो नहीं हुई।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि दिल्ली के छात्र इलाकों में तेजी से बढ़ते PG और हॉस्टल कारोबार के बीच क्या सुरक्षा नियमों की निगरानी उसी रफ्तार से हो रही है। अब जांच की दिशा सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि इमारत क्यों गिरी, बल्कि यह भी तय करना अहम होगा कि खतरे के संकेतों के बावजूद ऐसी इमारत में छात्रों का रहना कैसे जारी रहा और जिम्मेदारी किसकी थी।
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