[polylang_langswitcher]

CAI ने कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग तेज की

Cotton Import Duty

नई दिल्ली, 10 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत के कपास उद्योग में कच्चे माल की बढ़ती लागत को लेकर चिंता तेज होती जा रही है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने केंद्रीय सरकार के सामने 11% कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से रखी है। CAI का कहना है कि मौजूदा टैक्स संरचना भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक बाजार में नुकसान पहुंचा रही है, क्योंकि घरेलू कीमतें कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में ज्यादा हैं।

क्यों बढ़ रही है ड्यूटी हटाने की मांग?

CAI और स्पिनिंग मिलों का तर्क है कि देश में कॉटन की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों में उतार–चढ़ाव है। ऐसे समय में महंगा कच्चा कपास:

  • स्पिनिंग और वेविंग मिलों की लागत बढ़ा रहा है,
  • एक्सपोर्ट-फोकस्ड टेक्सटाइल यूनिट्स का मार्जिन घटा रहा है,
  • और भारतीय यार्न व फैब्रिक को बांग्लादेश, वियतनाम, तुर्किये और चीन जैसे देशों की तुलना में कम प्रतिस्पर्धी बना रहा है।

पिछले कुछ महीनों में घरेलू कॉटन कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से काफी ऊपर रही हैं, जिससे आयात पर निर्भर कई मिलें दबाव में हैं।

महंगा कच्चा कपास टेक्सटाइल चेन को कैसे प्रभावित कर रहा है?

भारत विश्व का बड़ा कॉटन उत्पादक और उपभोक्ता देश है, लेकिन घरेलू कीमतें ऊंची होने के कारण:

  • स्पिनिंग मिलों की यार्न लागत बढ़ रही है,
  • एक्सपोर्ट ऑर्डर्स वियतनाम और बांग्लादेश को शिफ्ट हो रहे हैं,
  • डाउनस्ट्रीम सेगमेंट—जैसे फैब्रिक और गारमेंट—को भी महंगी यार्न खरीदनी पड़ रही है,
  • और पूरे वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा कम हो रही है।

CAI का कहना है कि 11% इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने से उद्योग को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय कपास कीमतों में संतुलन मिलेगा और लागत कम होगी।

भारत की प्रतिस्पर्धा पर असर

चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे देश कम लागत पर कॉटन यार्न, फैब्रिक और रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात कर रहे हैं। भारतीय उद्योग का मानना है कि उच्च कच्चा माल लागत के कारण भारत अपनी पारंपरिक बढ़त खो रहा है, निर्यात बढ़ने की गति धीमी है, और कई मिलें आंशिक क्षमता पर चल रही हैं।

इम्पोर्ट ड्यूटी हटने से मिलों को किफायती रॉ मैटेरियल उपलब्ध होगा और वे वैश्विक ऑर्डर के लिए फिर से प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

सरकार के सामने उद्योग की दलील

CAI और टेक्सटाइल मिलें सरकार से आग्रह कर रही हैं कि कम से कम अस्थायी रूप से इम्पोर्ट ड्यूटी समाप्त की जाए, या जरूरत पड़ने पर टैरिफ रेट को कम किया जाए ताकि बाजार में कीमतें स्थिर हों और मिलों को राहत मिल सके।

इंडस्ट्री का कहना है कि इस कदम से न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि भारत के टेक्सटाइल निर्यात को 2025–26 तक नई गति मिल सकती है।

सरकार ने फिलहाल इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उद्योग जगत का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घरेलू कॉटन कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से ऊंची बनी रहीं, तो इम्पोर्ट ड्यूटी में राहत पर सरकार को विचार करना पड़ेगा।

===

हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची