नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): OMSS Policy – केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम-डोमेस्टिक यानी OMSS(D) के तहत सरकारी भंडार से गेहूं, चावल और मोटे अनाज की बिक्री की नीति घोषित कर दी है। नई नीति 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत निजी व्यापारियों, राज्य सरकारों, सामुदायिक रसोईघरों, केंद्रीय सहकारी संस्थाओं और इथेनॉल डिस्टिलरियों के लिए अलग-अलग आरक्षित मूल्य तय किए गए हैं।
नई नीति का सबसे चर्चित प्रावधान इथेनॉल उत्पादन के लिए सरकारी चावल की बिक्री से जुड़ा है। FCI के स्टॉक से इथेनॉल डिस्टिलरियों को 31 अक्टूबर 2026 तक ₹2,320 प्रति क्विंटल और इसके बाद 30 जून 2027 तक ₹2,390 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर चावल उपलब्ध कराया जाएगा। इथेनॉल के लिए चावल की कुल मात्रा का फैसला मंत्रियों की समिति द्वारा किया जाएगा।
यह रिजर्व प्राइस खरीफ सीजन 2026-27 के लिए कॉमन ग्रेड धान के घोषित MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल से कम है। वहीं, 2025-26 में किसानों से कॉमन ग्रेड धान ₹2,369 प्रति क्विंटल के MSP पर खरीदा गया था।
इथेनॉल के लिए सस्ते चावल पर नीतिगत सवाल
OMSS नीति में कहा गया है कि इथेनॉल डिस्टिलरियों को आपूर्ति के लिए जहां तक संभव हो, पुराने या टूटे चावल का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके बावजूद सरकारी चावल की आर्थिक लागत और डिस्टिलरियों के लिए तय रिजर्व प्राइस के बड़े अंतर को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
एक क्विंटल धान से सामान्यतः करीब 67 किलोग्राम चावल प्राप्त होता है। धान की खरीद कीमत के साथ खरीद संबंधी खर्च, मिलिंग चार्ज, भंडारण और परिवहन जैसे खर्चों को जोड़ने पर चावल की अनुमानित आर्थिक लागत करीब ₹4,100 प्रति क्विंटल बैठ सकती है।
इस अनुमान के आधार पर देखें तो लगभग ₹4,100 प्रति क्विंटल आर्थिक लागत वाला चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए ₹2,320 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि वास्तविक आर्थिक लागत स्टॉक वर्ष, खरीद लागत और अन्य खर्चों के आधार पर अलग हो सकती है।
यह अंतर ऐसे समय में नीतिगत बहस को जन्म दे सकता है, जब सरकार इथेनॉल उत्पादन को किसानों की आय बढ़ाने और ऊर्जा आयात निर्भरता कम करने के साधन के रूप में बढ़ावा देती रही है। सवाल यह है कि सार्वजनिक भंडार का अनाज काफी कम रिजर्व प्राइस पर डिस्टिलरियों को उपलब्ध कराने से खुले बाजार के संकेतों और किसानों को मिलने वाले दाम पर क्या असर पड़ेगा।
राज्यों और छोटे व्यापारियों के लिए चावल की दरें
OMSS नीति के तहत गैर-अधिशेष राज्यों की सरकारों और सामुदायिक रसोईघरों को भी 31 अक्टूबर तक ₹2,320 प्रति क्विंटल और इसके बाद ₹2,390 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के 25 प्रतिशत टूटे चावल का रिजर्व प्राइस निजी खरीदारों और सहकारी संस्थाओं के लिए 31 अक्टूबर तक ₹2,890 प्रति क्विंटल और इसके बाद ₹2,970 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
छोटे निजी व्यापारी और उद्यमी भी FCI डिपो से इन्हीं दरों पर चावल खरीद सकेंगे। ‘भारत’ ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री के लिए केंद्रीय सहकारी संस्थाओं को चावल 31 अक्टूबर तक ₹2,480 प्रति क्विंटल और इसके बाद ₹2,550 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर उपलब्ध कराया जाएगा।
गेहूं का रिजर्व प्राइस ₹2,600 प्रति क्विंटल
सरकार ने OMSS के तहत फेयर एवरेज क्वालिटी यानी FAQ गेहूं का रिजर्व प्राइस ₹2,600 प्रति क्विंटल तय किया है। मानकों में छूट वाले URS गेहूं के लिए रिजर्व प्राइस ₹2,585 प्रति क्विंटल रहेगा। ये दरें 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेंगी और इनमें परिवहन लागत शामिल नहीं होगी।
रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया था। इस लिहाज से FAQ गेहूं का OMSS रिजर्व प्राइस MSP से केवल ₹15 प्रति क्विंटल अधिक है।
गेहूं की बिक्री की मात्रा और समय FCI द्वारा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के परामर्श से तय किया जाएगा। इससे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS की जरूरतों, निर्धारित बफर स्टॉक मानकों और आपात स्थितियों के लिए अतिरिक्त 20 लाख टन गेहूं के भंडार को सुनिश्चित किया जाएगा।

मोटे अनाज के लिए भी रिजर्व प्राइस तय
नई OMSS नीति में मोटे अनाज की बिक्री दरें भी निर्धारित की गई हैं। निजी खरीदारों को ई-नीलामी के माध्यम से बाजरा ₹2,900 प्रति क्विंटल, रागी ₹5,205 प्रति क्विंटल, ज्वार ₹4,023 प्रति क्विंटल और मक्का ₹2,410 प्रति क्विंटल के रिजर्व प्राइस पर उपलब्ध कराया जाएगा। इन दरों में परिवहन लागत अलग से जोड़ी जाएगी।
पर्याप्त भंडार, लेकिन मानसून को लेकर अनिश्चितता
नई OMSS नीति ऐसे समय घोषित की गई है, जब केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल का बड़ा भंडार उपलब्ध है। हालांकि सरकार ने चालू खरीफ सीजन से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए बिक्री की मात्रा तय करने में सतर्क रुख रखा है।
कमजोर मानसून की शुरुआत, संभावित अल नीनो और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच खाद्यान्न उत्पादन तथा खाद्य महंगाई को लेकर जोखिम बने हुए हैं। ऐसे में सरकारी भंडार से अनाज की बिक्री का समय, मात्रा और मूल्य निर्धारण आने वाले महीनों में कृषि एवं खाद्य नीति की महत्वपूर्ण बहस का विषय रह सकता है।
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