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गेहूं निर्यात कोटा समीक्षा: DGFT ने तेज की प्रक्रिया, निर्यातकों को देनी होगी उपयोग की जानकारी

MP News

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने HS कोड 10011900 और 10019910 के तहत आवंटित गेहूं निर्यात कोटे की औपचारिक समीक्षा शुरू कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पहले से आवंटित कोटे के वास्तविक उपयोग का आकलन करना और अप्रयुक्त (बचे हुए) कोटे को जरूरत के आधार पर दोबारा आवंटित करना है।

DGFT के मुख्य दिशानिर्देश और समयसीमा

सोमवार को जारी ट्रेड नोटिस के अनुसार, यह समीक्षा 24 फरवरी 2026 और 30 अप्रैल 2026 के सार्वजनिक नोटिस के तहत जारी किए गए गेहूं निर्यात कोटे को ध्यान में रखकर की जा रही है।
  • निर्यात विवरण की मांग: DGFT ने सभी संबंधित निर्यातकों से 26 अगस्त 2026 तक की अवधि में वास्तव में निर्यात की गई मात्रा का पूरा विवरण मांगा है।
  • आवश्यक दस्तावेज: निर्यातकों को चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा जारी उपयोग प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate) और संबंधित शिपिंग बिल की प्रतियां जमा करनी होंगी।
  • अंतिम तिथि: सभी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज 31 अगस्त 2026 तक ईमेल के माध्यम से भेजने होंगे।

अतिरिक्त कोटे की मांग और सरेंडर करने का विकल्प

DGFT की समीक्षा प्रक्रिया के दौरान निर्यातकों को यह स्पष्ट करने का विकल्प दिया गया है कि क्या उन्हें अतिरिक्त गेहूं की आवश्यकता है। इसके अलावा, यदि किसी निर्यातक के पास अतिरिक्त कोटा बचा है जिसका उपयोग नहीं होना है, तो वे इसे सरेंडर करने का अनुरोध भी कर सकते हैं।
  • कारण बताना अनिवार्य: अतिरिक्त कोटे की मांग या कोटे को सरेंडर करने के अनुरोध के साथ उचित कारण देना जरूरी है।
  • वैध अनुबंध: अतिरिक्त मात्रा की मांग करने वाले निर्यातक वैध निर्यात अनुबंध या खरीद आदेश (Purchase Order) की प्रतियां भी साथ में जमा कर सकते हैं।
  • ऑनलाइन पोर्टल आवेदन: अतिरिक्त गेहूं की मांग करने वाले लाइसेंसधारकों को 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर संशोधन आवेदन भी दाखिल करना होगा। DGFT ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल के बाहर या तय तारीख के बाद मिलने वाले आवेदनों को खारिज कर दिया जाएगा।
DGFT
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पुनः-आवंटन के नियम और कॉमन पूल

ट्रेड नोटिस के मुताबिक, जिन निर्यातकों ने अपने कोटे का 50% से अधिक उपयोग कर लिया है, उन्हें गेहूं के पुनः-आवंटन की अगली प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
दूसरी ओर, जिन मामलों में कोटे का उपयोग 50% से कम पाया जाएगा, वहां बची हुई मात्रा को दोबारा आवंटन के लिए कॉमन पूल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। हालांकि, यदि निर्यातक वैध अनुबंध या खरीद आदेश प्रस्तुत करने में सफल रहते हैं, तो उनकी अप्रयुक्त मात्रा को कॉमन पूल में डालने से बचाया जा सकता है।
DGFT ने चेतावनी दी है कि तय समयसीमा के भीतर जानकारी न देने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, प्राधिकरण ने प्राप्त आवेदनों के आधार पर वितरण प्रक्रिया में बदलाव करने का अधिकार सुरक्षित रखा है।
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