[polylang_langswitcher]

बिहार: पूर्वी चंपारण में दो नई चीनी मिलों को मंजूरी, 422.5 करोड़ का निवेश; किसानों को मिलेगा बाजार

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

पटना (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार सरकार ने पूर्वी चंपारण जिले में दो नई चीनी मिल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। दोनों परियोजनाओं में कुल 422.50 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश होगा। राज्य के गन्ना उद्योग विभाग की आधिकारिक परियोजना सूची में पाकरीदयाल के चोर्मा और कोटवा के कंजहिया टोला में इन परियोजनाओं को कैबिनेट से मंजूर बताया गया है।

इन परियोजनाओं से पूर्वी चंपारण और आसपास के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय औद्योगिक बाजार मिलने की उम्मीद है। साथ ही, चीनी उत्पादन से जुड़े सहायक कारोबार, परिवहन, श्रम, कृषि सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

पकड़ीदयाल में 180 करोड़ की चीनी मिल और डिस्टिलरी

मधुबन विधानसभा क्षेत्र के पकड़ीदयाल प्रखंड के चोरमा में श्री गणेश शुगर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना प्रस्तावित है। बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार इस परियोजना में करीब 180 करोड़ रुपये का निवेश होगा। मिल की प्रस्तावित क्षमता 5,000 टन गन्ना प्रतिदिन (TCD) है, जबकि इसके साथ 50 KLPD क्षमता की डिस्टिलरी भी शामिल है।

इस परियोजना का सबसे सीधा लाभ आसपास के गन्ना किसानों को मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर पेराई की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को दूर स्थित मिलों तक गन्ना ले जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे परिवहन लागत और फसल की समय पर आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों में भी राहत मिलने की संभावना है।

कोटवा में 242.5 करोड़ रुपये की परियोजना

दूसरी परियोजना कोटवा प्रखंड के कंजहिया टोला में प्रस्तावित है। इसे राजश्री शुगर्स द्वारा स्थापित किया जाएगा। बिहार सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक इस परियोजना में 242.50 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें 5,000 TCD क्षमता की चीनी मिल, 28 मेगावाट का को-जनरेशन बिजली संयंत्र और 60 KLPD क्षमता की डिस्टिलरी शामिल होगी।

को-जनरेशन प्लांट इस परियोजना को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि गन्ने के उप-उत्पादों से ऊर्जा उत्पादन की संभावना भी बनाएगा। इससे परियोजना की औद्योगिक उपयोगिता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।

बिहार: गन्ना किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

पूर्वी चंपारण पहले से ही गन्ना उत्पादन वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। बिहार सरकार ने जून 2026 में चंपारण क्षेत्र को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में विकसित करने और चीनी उद्योग में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया था। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में चीनी उद्योग के पुनरुद्धार, निवेश को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे।

दो नई परियोजनाओं के आने से मधुबन, पकड़ीदयाल, कोटवा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को गन्ने के लिए अतिरिक्त खरीद केंद्र या मिल बाजार मिलने की संभावना है। इसका असर पड़ोसी इलाकों के किसानों पर भी पड़ सकता है, हालांकि वास्तविक लाभ परियोजनाओं के संचालन, गन्ना क्षेत्र के आवंटन और खरीद व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

बिहार: पूर्वी चंपारण में नई चीनी मिल
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें

रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है सहारा

चीनी मिलें केवल गन्ने की खरीद और चीनी उत्पादन तक सीमित रोजगार नहीं देतीं। मिलों के साथ परिवहन, मशीनरी संचालन, रखरखाव, डिस्टिलरी, बिजली उत्पादन, गोदाम, पैकेजिंग और अन्य सेवाओं में भी रोजगार के अवसर बनते हैं।

हालांकि परियोजनाओं से पैदा होने वाले रोजगार की अंतिम संख्या अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन दो बड़े औद्योगिक निवेश से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है।

सफलता की राह पर नज़र

बिहार सरकार की आधिकारिक परियोजना सूची में दोनों परियोजनाओं की स्थिति “Approved by Cabinet” दर्ज है। इसका अर्थ है कि कैबिनेट स्तर पर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है; इसके बाद जमीन, निर्माण, वित्तीय व्यवस्था, पर्यावरणीय और अन्य आवश्यक अनुमतियों जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।

इन दोनों परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण और संचालन की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और किसानों के लिए गन्ना खरीद की व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है। यदि परियोजनाएं निर्धारित क्षमता के साथ समय पर शुरू होती हैं, तो पूर्वी चंपारण में चीनी उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ गन्ना किसानों के लिए बाजार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिल सकता है।

======

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें

इन ख़बरों को भी पढ़ें…

यूरिया की कीमतों में बड़ी राहत; किसानों को मिल सकती है राहत

Sugar Price: चीनी मिलों पर कृत्रिम कमी पैदा करने का आरोप

Rice Trade: चीन ने 7 भारतीय चावल निर्यातकों का रजिस्ट्रेशन किया रद्द

मध्य प्रदेश के किसानों ने खत्म किया आंदोलन, राज्य सरकार ने मानी मांगें

खाद संकट से बचने के लिए संसदीय समिति ने सरकार को दी सलाह

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची