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रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक अनाज बाजार पर संकट गहराया, निर्यात बाधित होने से गेहूं की कीमतों में बढ़ी चिंता

Agri News

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब वैश्विक खाद्य आपूर्ति और अनाज व्यापार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आजोव सागर (Sea of Azov) और ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य हमलों के कारण दोनों देशों के अनाज निर्यात पर दबाव बढ़ गया है। दुनिया के प्रमुख गेहूं निर्यातक देशों में शामिल रूस और यूक्रेन की निर्यात क्षमता प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता गहरा गई है।

रूस के कृषि मंत्रालय ने कहा है कि यूक्रेन द्वारा आजोव सागर में रूसी जहाजों पर हमलों के बाद सरकार अनाज निर्यात के लिए वैकल्पिक बंदरगाहों और परिवहन मार्गों का उपयोग करने की तैयारी कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, रूस के कुल अनाज निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा आजोव सागर मार्ग से होता है। हालांकि, सरकार का दावा है कि देश के पास अन्य समुद्री बंदरगाहों और लॉजिस्टिक नेटवर्क की पर्याप्त क्षमता उपलब्ध है, जिससे निर्यात और घरेलू खाद्य आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

रूस को गेहूं निर्यात बनाए रखने की उम्मीद

रूस में नई गेहूं फसल की कटाई शुरू हो चुकी है और उत्पादन के बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की विदेशी कृषि सेवा (FAS) के अनुसार, विपणन वर्ष 2026-27 में रूस का गेहूं उत्पादन 8.85 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि निर्यात करीब 4.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैकल्पिक बंदरगाहों का प्रभावी उपयोग किया गया तो रूस वैश्विक गेहूं बाजार में अपनी मजबूत हिस्सेदारी बनाए रखने में सफल रह सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध: यूक्रेन की निर्यात क्षमता पर बढ़ा दबाव

दूसरी ओर, रूस के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूक्रेन की अनाज निर्यात व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। यूक्रेन के प्रमुख किसान संगठनों के अनुसार, ब्लैक सी मार्ग से अनाज निर्यात की क्षमता लगभग एक-तिहाई घट गई है।

पहले जहां हर महीने लगभग 60 लाख टन अनाज और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात किया जा रहा था, वहीं अब यह घटकर करीब 40 लाख टन रह गया है।

यूक्रेन के 90 प्रतिशत से अधिक अनाज और वनस्पति तेल का निर्यात ओडेसा क्षेत्र के तीन प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से होता है। लेकिन बंदरगाहों, अनाज टर्मिनलों, गोदामों और लॉजिस्टिक ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों ने पूरी आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध: बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स पर हमलों का असर

यूक्रेन की सबसे बड़ी अनाज निर्यातक कंपनी कर्नेल होल्डिंग ने चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर अपना परिचालन अस्थायी रूप से रोक दिया है। वहीं, बंदरगाह के 13 प्रमुख अनाज टर्मिनलों में से चार ने नई खरीद बंद कर दी है।

इसके अलावा, ओडेसा बंदरगाह की ओर जाने वाली अनाज रेल रैक की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश की निर्यात क्षमता और कमजोर हुई है।

वैश्विक गेहूं बाजार में बढ़ सकती है अस्थिरता

रूस और यूक्रेन मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय अनाज बाजार पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध: बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जुलाई के दौरान हार्ड रेड विंटर (HRW) गेहूं की कीमतों में आई तेजी के पीछे ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ता जोखिम प्रमुख कारण है। यदि आने वाले महीनों में सैन्य हमले जारी रहते हैं, तो वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध
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रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा यूरोप में मौसम ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक अनाज बाजार पर दबाव केवल रूस-यूक्रेन युद्ध तक सीमित नहीं है। यूरोप भी इस समय भीषण गर्मी और प्रतिकूल मौसम की मार झेल रहा है।

यूरोपीय अनाज व्यापार संगठन COCERAL ने वर्ष 2026 के लिए यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन के अनाज उत्पादन का संशोधित अनुमान जारी करते हुए कुल उत्पादन 28.66 करोड़ टन रहने की संभावना जताई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 2.34 करोड़ टन कम है।

संगठन ने गेहूं उत्पादन का अनुमान घटाकर 14.08 करोड़ टन कर दिया है, जबकि 2025 में यह 14.98 करोड़ टन था। मक्का उत्पादन का अनुमान भी घटाकर 5.27 करोड़ टन किया गया है। फ्रांस में अत्यधिक गर्मी के कारण दो दशक से अधिक समय का सबसे कम मक्का उत्पादन होने की आशंका जताई गई है। जौ उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान है, जबकि रेपसीड उत्पादन में मामूली कमी की संभावना व्यक्त की गई है।

रूस-यूक्रेन युद्ध: खाद्य महंगाई का बढ़ सकता है जोखिम

ब्लैक सी क्षेत्र में निर्यात बाधाएं और यूरोप में मौसम के कारण उत्पादन में गिरावट, दोनों मिलकर वैश्विक अनाज आपूर्ति पर दबाव बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आयात पर निर्भर देशों को ऊंची कीमतों पर अनाज खरीदना पड़ सकता है।

इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय खाद्य महंगाई में भी बढ़ोतरी का जोखिम बना रहेगा। आने वाले महीनों में वैश्विक अनाज बाजार की दिशा काफी हद तक रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप के मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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