मुंबई (कृषि भूमि ब्यूरो): महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की है कि राज्य में 7.5 हॉर्स पावर (एचपी) तक के कृषि बिजली कनेक्शनों पर बकाया करीब ₹48,000 करोड़ के पुराने बिजली बिल माफ किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को पुराने बकाया के बोझ से मुक्त कर आर्थिक रूप से नई शुरुआत का अवसर देना है।
मुंबई में बुधवार को भाजपा किसान मोर्चा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के खातों को पूरी तरह “कोरा” करना चाहती है, ताकि पुराने बकाया के कारण भविष्य में किसी प्रकार की वसूली, कानूनी कार्रवाई या प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े।
महाराष्ट्र के किसानों को मिलेगा पुराने बकाया से स्थायी राहत
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि लंबे समय से कई किसान बिजली बिलों के भारी बकाया के कारण मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। सरकार का मानना है कि यदि किसानों को इस बोझ से मुक्त किया जाए तो वे कृषि उत्पादन और नई तकनीकों को अपनाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राहत 7.5 एचपी तक के कृषि बिजली कनेक्शन रखने वाले किसानों के लिए लागू होगी। सरकार जल्द ही इस योजना की विस्तृत प्रक्रिया और पात्रता संबंधी दिशा-निर्देश जारी करेगी।
महाराष्ट्र: दिन में 12 घंटे मुफ्त बिजली देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सभी किसानों को दिन के समय 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में महाराष्ट्र के लगभग 76 प्रतिशत किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दिन के समय बिजली मिलने से किसानों को रात में खेतों पर जाकर सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि कृषि कार्य भी अधिक सुविधाजनक और प्रभावी होगा।
सरकार ‘सौर कृषि वाहिनी’ सहित कृषि पंपों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को तेजी से लागू कर रही है, जिससे कृषि क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थायी और भरोसेमंद बनाया जा सके।
कर्जमाफी योजना में भी बड़ा संशोधन
बिजली बिल माफी की घोषणा से पहले महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना-2026’ में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी थी।
सरकार ने वर्ष 2019 की किसान कर्जमाफी योजना के लाभार्थियों के लिए लागू ₹50,000 की अधिकतम प्रोत्साहन सीमा समाप्त कर दी है। इसके अलावा, वर्ष 2026-27 में नियमित रूप से ऋण चुकाने की अनिवार्य शर्त भी हटा दी गई है।
इन बदलावों के बाद अधिक संख्या में किसानों को योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।

23 लाख किसानों को मिलेगा फायदा
राज्य सरकार के अनुसार, संशोधित प्रावधानों के तहत करीब 23 लाख किसान प्रोत्साहन लाभ के पात्र बन जाएंगे। वहीं, वर्ष 2019 की कृषि ऋण माफी योजना के तहत लाभ प्राप्त कर चुके लगभग 13 लाख किसानों को भी अब बिना किसी पूर्व वित्तीय सीमा के प्रोत्साहन राशि का लाभ मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
राज्य सरकार का दावा है कि बिजली बिल माफी, मुफ्त बिजली और कर्जमाफी योजना में संशोधन जैसे कदम किसानों की लागत कम करने में मदद करेंगे। इससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार आने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो यह महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राहत पैकेज साबित हो सकता है। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन, पात्रता और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विस्तृत सरकारी दिशा-निर्देश जारी होने के बाद इसकी वास्तविक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी।
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