नई दिल्ली, 24 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अंतरराष्ट्रीय बाजार में रबर की कीमतों में हाल के दिनों में कमजोरी देखने को मिली है। भाव 180 सेंट प्रति किलो से नीचे फिसल गए हैं, जो दिसंबर 2025 के बाद का निचला स्तर माना जा रहा है। बाजार पर अच्छे मौसम के अनुमान और सप्लाई से जुड़ी स्थितियों का दबाव बना हुआ है।
थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे बड़े उत्पादक देशों में मौसम को लेकर अनुकूल संकेत मिल रहे हैं। थाईलैंड में मॉनसून कमजोर रहने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक बाजार में फिलहाल कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।
इंटरनेशनल मार्केट में रबर की चाल
हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो रबर की कीमतों में उतार-चढ़ाव साफ दिखता है:
| अवधि | कीमतों में बदलाव |
|---|---|
| पिछले 1 हफ्ते | करीब 2% की गिरावट |
| पिछले 1 महीने | लगभग 3% की तेजी |
| जनवरी 2026 (अब तक) | करीब 0.50% की बढ़त |
नियम और वैश्विक हालात का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक जियोपॉलिटिकल टेंशन के साथ-साथ European Union के डिफॉरेस्टेशन नियमों का असर भी रबर बाजार पर पड़ रहा है। यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होना था, लेकिन फिलहाल इसे कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके चलते इंटरनेशनल मार्केट में अनिश्चितता और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
भारत में क्या है स्थिति?
भारत में रबर का औसत उत्पादन करीब 7.70 लाख टन रहता है, लेकिन इस समय उत्पादन कम है। घरेलू बाजार में मांग के मुकाबले सप्लाई में कमी देखने को मिल रही है। चालू साल में रबर उत्पादन 4–5 फीसदी कम रहने की संभावना जताई जा रही है।
आगे रबर की कीमतों का आउटलुक
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिलहाल कमजोरी के बावजूद, भारत में सप्लाई की कमी और चीन से संभावित मांग बढ़ने के संकेत आगे चलकर रबर की कीमतों को सहारा दे सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में रबर के भाव में धीरे-धीरे तेजी देखने को मिल सकती है।
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