नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): बीते कुछ हफ्तों के दौरान उड़द की कीमतों में देखने को मिल रही तेजी अब नरम पड़ने लगी है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मध्य और उत्तर भारत में उड़द की बुवाई सुधरने, सस्ते आयात और मिल मालिकों की तरफ से मांग कमजोर होने के कारण कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
बढ़ा बुवाई का रकबा
देश में इस साल उड़द का कुल रकबा पिछले साल के 19.8 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 10 प्रतिशत बढ़कर 31 जुलाई तक 21.08 लाख हेक्टेयर हो गया है, हालांकि अन्य दालों का कुल रकबा अभी भी पिछले साल के स्तर से पीछे चल रहा है।
उत्तर प्रदेश: रकबा 61% बढ़कर 5.52 लाख हेक्टेयर हुआ।
मध्य प्रदेश: रकबा 16% बढ़कर 6.72 लाख हेक्टेयर हुआ।
राजस्थान: रकबा 20% बढ़कर 3.75 लाख हेक्टेयर हुआ।
गुजरात: रकबा 40% बढ़कर 0.71 लाख हेक्टेयर हुआ।
इसके विपरीत, कर्नाटक में रकबा 25% और महाराष्ट्र में 50% तक घट गया है।
मंडियों में नीचे आ रहे हैं उड़द के भाव
कृषि मंत्रालय के अनुसार, तीन हफ्ते पहले उड़द की औसत अखिल भारतीय थोक कीमत 9,132 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी, जो 3 अगस्त तक घटकर 8,638 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है। व्यापारिक संस्था इंडिया पल्सेस एंड ग्रेंस एसोसिएशन (IPGA) के मुताबिक, आयातित और घरेलू दोनों तरह की उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट आई है। म्यांमार से सस्ता आयात होने, रुपये की मजबूती, अच्छी बारिश के बाद बुवाई में सुधार और मिल मालिकों द्वारा कम खरीदारी के कारण कीमतों पर यह दबाव बना है।
आगे कैसा रहेगा बाजार का हाल?
IPGA का अनुमान है कि आने वाले समय में भी उड़द की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। चेन्नई बंदरगाह पर अगस्त के मध्य तक विदेशों से लगातार उड़द की सप्लाई आती रहेगी। वर्तमान में म्यांमार की ‘एसक्यू’ उड़द लगभग 9,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रही है, और यदि यह समर्थन स्तर टूटता है तो भाव 9,350 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर सकते हैं।
यदि मौसम अनुकूल रहा तो खरीफ उड़द की एक अच्छी फसल आने की उम्मीद है। नई फसल की आवक मध्य सितंबर से शुरू होने और सितंबर के अंत तक बढ़ने की संभावना है, साथ ही इसी दौरान ब्राजील से भी उड़द की नई खेप आनी शुरू हो जाएगी।