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कपास किसानों को बड़ी राहत: MSP सपोर्ट के लिए ₹1,718.56 करोड़ मंजूर

नई दिल्ली, 19 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने कपास किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने भारतीय कपास निगम (CCI) को 2023-24 सीजन के लिए ₹1,718.56 करोड़ की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सहायता मंजूर की है।

यह सहायता सीधे तौर पर किसानों को तब फायदा पहुंचाएगी जब बाजार में कपास की कीमत MSP से नीचे चली जाती है।

MSP व्यवस्था कैसे करती है काम

एमएसपी व्यवस्था किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। जब खुले बाजार में कीमतें गिरती हैं, तब CCI किसानों से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास खरीदती है। इससे किसानों को मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने से बचाव मिलता है और उन्हें एक स्थिर आय सुनिश्चित होती है।

यह हस्तक्षेप बाजार में कीमतों को संतुलित रखने में भी अहम भूमिका निभाता है।

CCI की भूमिका और खरीद प्रणाली

सरकार ने CCI को इस पूरी प्रक्रिया के लिए केंद्रीय एजेंसी बनाया है। यह एजेंसी देशभर में किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) कपास की बिना किसी सीमा के खरीद करती है।

CCI ने 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में अपना नेटवर्क मजबूत किया है। 152 जिलों में फैले 508 से अधिक खरीद केंद्र किसानों को नजदीक ही अपनी उपज बेचने की सुविधा देते हैं, जिससे उन्हें लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती।

उत्पादन और अर्थव्यवस्था में योगदान

पैरामीटरआंकड़े
बुवाई क्षेत्र114.47 लाख हेक्टेयर
उत्पादन325.22 लाख गांठ
वैश्विक हिस्सेदारीलगभग 25%

कपास भारत की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। इससे करीब 60 लाख किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है, जबकि वस्त्र उद्योग और व्यापार सहित इससे जुड़े क्षेत्रों में करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। यह सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

टेक्नोलॉजी से पारदर्शिता पर जोर

CCI ने MSP ऑपरेशन को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। बेल आइडेंटिफिकेशन एंड ट्रेसबिलिटी सिस्टम (BITS) के जरिए कपास की ट्रैकिंग आसान हुई है, जबकि “Cott-Ally” मोबाइल ऐप किसानों तक जानकारी पहुंचाने में मदद कर रहा है।

इन पहलों से खरीद प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद और व्यवस्थित बनी है।

क्या होगा इसका असर

यह निर्णय न केवल किसानों को मूल्य गिरावट से सुरक्षा देगा, बल्कि बाजार में स्थिरता भी लाएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कपास उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और टेक्सटाइल उद्योग को भी नियमित सप्लाई सुनिश्चित होगी।

सरकार का यह कदम कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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