नई दिल्ली, 17 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते हमलों के कारण ‘एनर्जी वॉर’ जैसे हालत हैं। इससे बाजार में उथल-पुथल के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
गुरुवार, 19 मार्च को शुरुआती एशियाई ट्रेडिंग में US क्रूड (WTI) लगभग 3.5% उछलकर $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड, जो बुधवार को गिरावट के बाद संभला था, $110 पर बंद हुआ और गुरुवार सुबह 4% की तेजी के साथ $112 प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
क्रूड और गैस कीमतों में उछाल
ऊर्जा बाजार में यह उछाल केवल तेल तक सीमित नहीं रहा। US नेचुरल गैस की कीमतों में भी रातोंरात लगभग 5% की बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट अपने शुरुआती युद्धकालीन हाई $120 के करीब पहुंच गया। सप्लाई बाधित होने की आशंका से ट्रेडर्स में घबराहट बढ़ी
हमलों की वजह से बढ़ा संकट
तनाव की जड़ साउथ पारस गैस फील्ड पर हुए हमले हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक है। इज़राइल के हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला किया। एक मिसाइल लक्ष्य पर लगी, जबकि चार को इंटरसेप्ट कर लिया गया। रास लफ़्फ़ान में दुनिया की सबसे बड़ी LNG उत्पादन साइट स्थित है, जो पहले से बंद थी। साथ ही, ईरान के असलुयेह क्षेत्र में तेल और पेट्रोकेमिकल एसेट्स को भी नुकसान पहुंचा है।
वैश्विक सप्लाई पर खतरा
साउथ पारस गैस फील्ड न केवल ईरान के घरेलू उपयोग के लिए अहम है, बल्कि इराक और तुर्की जैसे देशों को सप्लाई के लिए भी महत्वपूर्ण है। अबू धाबी ने भी अपनी हबशान गैस फैसिलिटी में ऑपरेशन रोक दिया है, जिससे सप्लाई चेन पर और दबाव बढ़ गया है।
बहरीन में LNG एसेट्स पर भी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इज़राइल के हमले की जानकारी थी, लेकिन वे ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर आगे हमले नहीं चाहते। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार भी जा सकती हैं।
प्रमुख ऊर्जा संकेतक (19 मार्च)
| ऊर्जा उत्पाद | कीमत |
|---|---|
| ब्रेंट क्रूड | $112/बैरल |
| WTI क्रूड | ~$99/बैरल |
| नेचुरल गैस | +5% उछाल |
| पिछला हाई (युद्ध) | ~$120/बैरल |
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है, तो तेल और गैस की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और भारत जैसे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
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