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Crude Oil Price: US-ईरान युद्ध से तेल बाजार में उथल-पुथल, 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil – US और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को झकझोर दिया है। सप्लाई चेन पर खतरे और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तीन हफ्ते के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने से तेल उत्पादक देशों के साथ-साथ उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।

Crude Oil Price: ब्रेंट और WTI में लगातार सातवें दिन तेजी

Crude Oil की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स $3.03 यानी 2.8% बढ़कर $111.26 प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं, US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स $3.56 यानी 3.7% की बढ़त के साथ $99.93 प्रति बैरल पर सेटल हुआ। सत्र के दौरान WTI $100 के स्तर को भी पार कर गया, जो 13 अप्रैल के बाद पहली बार हुआ।

Crude Oil
Crude Oil Price: होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा जोखिम

यह लगातार सातवां दिन है जब तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है, जो बाजार में गहराते संकट की ओर इशारा करता है।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा जोखिम

मध्य पूर्व का रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। अनुमान है कि दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की खबरों ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी है।

शिपिंग डेटा के अनुसार, इस क्षेत्र में कई टैंकर फंसे हुए हैं और कुछ को वापस लौटना पड़ा है। हालांकि सीमित स्तर पर आवाजाही जारी है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है।

UAE का OPEC से बाहर होना बना बड़ा झटका

तेल बाजार को एक और बड़ा झटका तब लगा जब संयुक्त अरब अमीरात ने 1 मई से OPEC और OPEC+ समूह से बाहर होने का फैसला किया। UAE, OPEC का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और इसकी हिस्सेदारी लगभग 12% है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में यह फैसला कीमतों में गिरावट ला सकता था, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव ने इसका असर सीमित कर दिया है।

कूटनीतिक वार्ता में गतिरोध

US के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के युद्धविराम प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं, जिससे वार्ता में गतिरोध बना हुआ है। ईरान ने साफ किया है कि जब तक क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त नहीं होता, वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करेगा।

इस गतिरोध के चलते संघर्ष लंबा खिंच सकता है, जिससे तेल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।

सप्लाई संकट और बढ़ती कीमतें

डेटा के अनुसार, 24 अप्रैल तक वैश्विक स्तर पर रुके हुए टैंकरों में कच्चे तेल की मात्रा बढ़कर 153 मिलियन बैरल हो गई है, जो जनवरी के बाद सबसे अधिक है। यह सप्लाई चेन में गंभीर बाधा का संकेत है।

World Bank ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो 2026 में वैश्विक ऊर्जा कीमतें 24% तक बढ़ सकती हैं।

Crude Oil Price: एक्सपर्ट्स की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई बाधाओं के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी रह सकती है। हालांकि UAE के OPEC से बाहर होने का तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन लंबी अवधि में यह बाजार संरचना को प्रभावित कर सकता है।

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

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