[polylang_langswitcher]
बागवानी उत्पादन

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): बागवानी उत्पादन: देश का बागवानी क्षेत्र एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में भारत का कुल बागवानी उत्पादन 377.78 मिलियन टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 370.74 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में लगभग 7 मिलियन टन अधिक है।

सरकार का कहना है कि बागवानी फसलों के अंतर्गत क्षेत्रफल में मामूली वृद्धि और कई प्रमुख फसलों की बेहतर उत्पादकता के चलते बागवानी उत्पादन में यह बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बागवानी उत्पादन में फल, सब्जियां, मसाले, फूल, बागान फसलें, सुगंधित एवं औषधीय पौधे तथा शहद शामिल हैं।

बागवानी फसलों का रकबा बढ़ा

कृषि मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 में बागवानी फसलों के तहत कुल क्षेत्रफल 30.15 मिलियन हेक्टेयर रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष यह क्षेत्रफल 30.14 मिलियन हेक्टेयर था। हालांकि बढ़ोतरी मामूली है, लेकिन बेहतर प्रबंधन, उन्नत किस्मों और अनुकूल मौसम की वजह से बागवानी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों का बागवानी फसलों की ओर बढ़ता रुझान भी इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण है, क्योंकि इन फसलों से अपेक्षाकृत अधिक आय प्राप्त होती है।

फलों के उत्पादन में 3.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी

देश में फलों का उत्पादन इस वर्ष 121.48 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 117.65 मिलियन टन की तुलना में 3.25 प्रतिशत अधिक है।

फलों के उत्पादन में वृद्धि का प्रमुख योगदान केला, आम, पपीता, सेब और अमरूद जैसी फसलों से मिलने की उम्मीद है। इन फसलों में बेहतर पैदावार और कई राज्यों में अनुकूल मौसम ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की है।

फल उत्पादन में बढ़ोतरी से घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।

सब्जियों का उत्पादन 221 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान

सब्जियों का उत्पादन भी इस वर्ष नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कुल सब्जी उत्पादन 217.8 मिलियन टन से बढ़कर 221 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो 1.47 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

बागवानी उत्पादन: सब्जियों के उत्पादन में बढ़ोतरी के पीछे आलू, टमाटर, मटर, फूलगोभी, लौकी और भिंडी की बेहतर पैदावार प्रमुख कारण मानी जा रही है।

इसके साथ ही सब्जियों की खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में यह 11.79 मिलियन हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढ़कर 11.88 मिलियन हेक्टेयर होने का अनुमान है।

बागवानी उत्पादन: प्याज, आलू और टमाटर की क्या है स्थिति?

देश की रसोई में अहम भूमिका निभाने वाली प्याज की खेती के क्षेत्रफल में 2.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका रकबा 1.97 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 2.01 मिलियन हेक्टेयर पहुंच गया है।

हालांकि क्षेत्रफल बढ़ने के बावजूद प्याज का उत्पादन लगभग स्थिर रहने की उम्मीद है। वर्ष 2025-26 में प्याज उत्पादन 30.75 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 30.77 मिलियन टन था।

दूसरी ओर, आलू और टमाटर के उत्पादन में अच्छी वृद्धि दर्ज होने का अनुमान है।

फसल2024-25 उत्पादन (मिलियन टन)2025-26 अनुमान (मिलियन टन)वृद्धि
प्याज30.7730.75स्थिर
आलू58.5759.892.25%
टमाटर20.6021.464.19%

आलू और टमाटर की बढ़ी हुई पैदावार से बाजार में आपूर्ति बेहतर रहने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।

बागवानी उत्पादन
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ के व्हाट्सएप्प चैनल से जुड़ें

फूलों और औषधीय पौधों की खेती में भी तेजी

फूलों की खेती में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है। मंत्रालय के मुताबिक, फूलों का उत्पादन 42.65 लाख टन से बढ़कर 45.84 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो 7.47 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।

फूलों की खेती का क्षेत्रफल भी 3.97 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 4 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है। धार्मिक आयोजनों, सजावट उद्योग और निर्यात मांग के कारण इस क्षेत्र में किसानों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

वहीं, सुगंधित एवं औषधीय पौधों का उत्पादन 9.01 लाख टन से बढ़कर 9.76 लाख टन होने की संभावना है। आयुर्वेद, हर्बल उत्पादों और प्राकृतिक चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ती मांग से इस क्षेत्र को मजबूती मिल रही है।

मसालों और बागान फसलों का भी बढ़ेगा योगदान

मसालों का कुल क्षेत्रफल लगभग 50 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। वर्ष 2025-26 में मसालों का उत्पादन 126.55 लाख टन तक पहुंच सकता है। लहसुन, हल्दी, करी पत्ता और मेथी की बेहतर पैदावार से इस वृद्धि को समर्थन मिला है।

इसके अलावा बागान फसलों का क्षेत्रफल 46.56 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 169.34 लाख टन रहने का अनुमान है। चाय, कॉफी, नारियल और अन्य बागान फसलें देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

बागवानी उत्पादन: किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका

बागवानी क्षेत्र की लगातार बढ़ती हिस्सेदारी भारतीय कृषि के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। रिकॉर्ड उत्पादन से किसानों की आय बढ़ने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को कच्चा माल मिलने और निर्यात अवसरों में विस्तार की उम्मीद है। यदि अनुमानित उत्पादन हासिल होता है, तो वर्ष 2025-26 भारत के बागवानी क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे सफल वर्ष साबित हो सकता है।

====

इन ख़बरों को भी पढ़ें…

खरीफ 2026: जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद

ग्रामीण विकास को बड़ी ताकत: केंद्र ने राज्यों को जारी किए 95,692 करोड़ रुपये, नई योजना के सुचारू क्रियान्वयन पर जोर

GDP 7.7% बढ़ी, लेकिन कृषि क्षेत्र की रफ्तार धीमी; 2025-26 में ग्रोथ घटकर 3% पर पहुंची

मई 2026 में वैश्विक खाद्य कीमतें रहीं लगभग स्थिर, अनाज और चीनी महंगी, वनस्पति तेल सस्ते

केला उत्पादकों पर TR4 फंगस का खतरा, 50,000 करोड़ रुपये की केला अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा संकट

अक्टूबर तक कॉटन आयात शुल्क मुक्त, उद्योग को राहत; किसानों पर बढ़ेगा दबाव

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची