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ICAR का 98वां स्थापना दिवस: कृषि क्षेत्र में नई क्रांति, 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित

ICAR

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): ICAR: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। अपने 98वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में, परिषद ने देश के कृषि परिदृश्य को नई दिशा देने वाली अपनी वार्षिक उपलब्धियों का विवरण साझा किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर घोषणा की कि पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं।

जलवायु अनुकूल और बायोफोर्टिफाइड फसलों पर जोर

ICAR द्वारा विकसित इन किस्मों में से 94 प्रतिशत किस्में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम (जलवायु अनुकूल) हैं। इसके अतिरिक्त, पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 29 बायोफोर्टिफाइड किस्में भी तैयार की गई हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों को कृषि का ‘मस्तिष्क’ और किसानों को ‘आत्मा’ बताते हुए कहा कि इन नवाचारों से देश खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

प्रमुख उपलब्धियों का सारांश (वर्ष 2025-26)

क्षेत्र प्रमुख उपलब्धि / योगदान
कुल फसल किस्में 386 नई किस्में (44 फसलों में)
आर्थिक प्रभाव 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त मूल्य सृजन
अनुसंधान का योगदान अनुमानित 55,000 करोड़ रुपये का योगदान
समझौते 51 उद्योगों के साथ 72 समझौते

प्रौद्योगिकी का व्यावसायीकरण और विस्तार

ICAR की रणनीति अब केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘प्रयोगशाला से खेत तक’ (Lab to Land) तकनीक को तेजी से पहुंचाने पर केंद्रित है। मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के नेटवर्क को और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा ताकि तकनीकें सीधे किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक पहुंच सकें।

नई प्रौद्योगिकियों का विमोचन

स्थापना दिवस के अवसर पर बासमती धान की विशेष किस्मों सहित कुल 43 उन्नत किस्में जारी की गईं। इसके अलावा 17 अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों का भी अनावरण हुआ:

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  • लवण और क्षारीय मिट्टी सहनशील धान: खराब भूमि में भी अच्छी पैदावार के लिए।

  • अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका: भारत का पहला स्वदेशी टीका, जो पशुपालन के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

  • डिजिटल स्वाइन रोग एटलस: रोगों की पहचान और नियंत्रण के लिए डिजिटल समाधान।

  • किफायती कसावा हार्वेस्टर: छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम लागत वाली मशीनरी।

विकसित भारत 2047 का दृष्टिकोण

डेयर के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने ‘विकसित भारत 2047’ के लिए कृषि के रोडमैप पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अनुसंधान और नवाचारों के चलते पिछले एक साल में जो 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ है, उसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक अनुसंधान का योगदान लगभग 55,000 करोड़ रुपये का रहा है। परिषद का लक्ष्य अब दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और कृषि शिक्षा की गुणवत्ता को विश्व स्तरीय बनाना है।

51 प्रमुख औद्योगिक घरानों के साथ किए गए 72 समझौतों के माध्यम से, ICAR यह सुनिश्चित कर रहा है कि विकसित की गई प्रौद्योगिकियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जल्द से जल्द बाजार और किसानों के खेतों तक पहुंचें। यह कदम निश्चित रूप से भारत को एक वैश्विक कृषि शक्ति बनाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है।

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