नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): खरीफ: जून के सूखे और कमजोर शुरुआती मानसून के बाद जुलाई महीने में देश के कई हिस्सों में बारिश की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। जून में देश में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, लेकिन जुलाई की सक्रियता के कारण यह संचयी कमी अब घटकर 24 प्रतिशत पर आ गई है। हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश के चलते कम वर्षा वाले प्रभावित जिलों की संख्या भी 262 से घटकर 178 हो गई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अल नीनो के संभावित प्रभावों और मानसून की अनिश्चितताओं पर लगातार नजर रख रही है और राज्यों के साथ मिलकर आकस्मिक योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
खरीफ बुवाई में 91.95 लाख हेक्टेयर की गिरावट, वैकल्पिक फसलों की सलाह
कृषि मंत्री ने बताया कि मानसून की शुरुआती देरी के कारण अब तक देश में कुल 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खरीफ फसलों की बुवाई हो सकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून के इस असंतुलन का सबसे बड़ा और सीधा असर सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख नकदी फसलों की बुवाई पर पड़ा है।
इस अंतर को पाटने के लिए कृषि मंत्रालय ने किसानों को एक नई रणनीति अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत किसानों को मक्का, बाजरा, और मूंग जैसी कम अवधि में तैयार होने वाली और न्यूनतम पानी की आवश्यकता वाली वैकल्पिक फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि सीजन की भरपाई की जा सके।
प्रभावित राज्यों पर विशेष नजर और जिला-वार ‘कंटिंजेंसी प्लान’
केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र पर मानसून के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए अप्रैल से ही जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी थीं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तकनीकी सहयोग से देश के संभावित रूप से प्रभावित सभी जिलों के लिए जिला-वार आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार की गई हैं, जिन्हें राज्य सरकारों के साथ साझा किया जा चुका है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, Bihar, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे 13 प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में फसलों और बारिश की स्थिति पर विशेष और चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
‘खेत बचाओ अभियान’ और 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार
संकट प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए जून महीने में सरकार द्वारा देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया गया था। इस अभियान के तहत देश के विभिन्न कोनों में 1.24 लाख से अधिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 80 लाख से अधिक किसानों तक सीधी पहुंच बनाई गई। इन कार्यक्रमों में वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते मौसम के अनुकूल फसल प्रबंधन की जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त, यदि मौसम की मार के कारण फसलों को नुकसान होता है या दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ती है, तो बीजों की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने 1.75 लाख क्विंटल क्षमता का ‘राष्ट्रीय बीज भंडार’ पूरी तरह से बफर स्टॉक के रूप में तैयार रखा है।

वित्तीय सुरक्षा कवच: किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा
कृषि क्षेत्र को इस मानसूनी अनिश्चितता के बीच वित्तीय स्थिरता देने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) अभियान की रफ्तार को दोगुना कर दिया है। कृषि मंत्री के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक प्राप्त हुए 1.14 लाख KCC आवेदनों में से 94 हजार से अधिक आवेदनों को तत्काल प्रभाव से स्वीकृत कर वित्तीय सहायता जारी कर दी गई है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दायरे को और अधिक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से फसलों को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
अल नीनो मॉनिटरिंग सेल और एकीकृत नियंत्रण कक्ष सक्रिय
भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए केंद्र सरकार का निगरानी तंत्र इस समय युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। मंत्रालय के तहत काम करने वाली ‘अल नीनो मॉनिटरिंग सेल’, ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ और राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। विभिन्न क्षेत्रों के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी दैनिक आधार पर मानसून की प्रगति, खरीफ बुवाई के साप्ताहिक आंकड़ों, खड़ी फसलों के स्वास्थ्य और देश के विभिन्न कृषि बाजारों में जिंसों की आवक और कीमतों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
भारतीय मानसून एवं खरीफ बुवाई 2026: एक नज़र में
| मुख्य संकेतक | वर्तमान स्थिति / डेटा | जून की स्थिति की तुलना में बदलाव |
| देश में संचयी वर्षा की कमी | 24% प्रतिशत | 33% से घटकर 24% हुई (सुधार) |
| कम वर्षा वाले प्रभावित जिले | 178 जिले | 262 जिलों से घटकर 178 हुए |
| अब तक कुल खरीफ बुवाई | 350.85 लाख हेक्टेयर | पिछले वर्ष से 91.95 लाख हेक्टेयर पीछे |
| राष्ट्रीय बीज भंडार (बफर) | 1.75 लाख क्विंटल | आपातकालीन बुवाई के लिए सुरक्षित |
| किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) स्वीकृति | 94,000+ आवेदन स्वीकृत | कुल 1.14 लाख आवेदनों में से त्वरित प्रक्रिया |
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