नई दिल्ली ( कृषि भूमि ब्यूरो): OMSS Policy: केंद्र सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं बिक्री नीति की घोषणा के बाद घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिली है। हालांकि, व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्टॉक बाजार में आने से आपूर्ति में कुछ सुधार जरूर होगा, लेकिन मौजूदा मांग और सीमित उपलब्धता को देखते हुए कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है।
सरकार ने OMSS के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, आटा मिलों और अन्य बड़े खरीदारों को भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से गेहूं उपलब्ध कराने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य खुले बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों को नियंत्रित रखना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।
सरकारी बिक्री से बढ़ेगी बाजार में उपलब्धता
OMSS के तहत एफसीआई समय-समय पर ई-नीलामी के माध्यम से खुले बाजार में गेहूं बेचता है। इससे निजी कारोबारियों और आटा मिलों को सीधे सरकारी स्टॉक से खरीद का अवसर मिलता है, जिससे बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आती है।
OMSS नीति की घोषणा के बाद कुछ प्रमुख मंडियों में गेहूं के भाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि यह गिरावट सीमित रही है और अधिकांश बाजारों में कीमतें अभी भी मजबूत स्तर पर बनी हुई हैं।
मजबूत मांग बनी हुई है
विशेषज्ञों के अनुसार, देश में गेहूं और आटे की खपत लगातार बनी हुई है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, बिस्कुट एवं ब्रेड निर्माता, होटल-रेस्तरां और घरेलू उपभोग की मांग बाजार को समर्थन दे रही है।
इसके अलावा, कई राज्यों में निजी व्यापारियों के पास स्टॉक सीमित है, जिसके कारण बाजार में खरीदारी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। यही वजह है कि OMSS के जरिए सरकारी बिक्री शुरू होने के बावजूद कीमतों पर दबाव सीमित रहने की संभावना है।
सरकारी स्टॉक और बाजार की स्थिति
सरकार के पास इस वर्ष रबी विपणन सीजन में अच्छी मात्रा में गेहूं की खरीद हुई है, जिससे केंद्रीय पूल का स्टॉक मजबूत हुआ है। यही स्टॉक अब OMSS के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिक्री नियमित और पर्याप्त मात्रा में जारी रहती है तो थोक बाजार में कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, किसी बड़ी गिरावट के लिए बाजार में आपूर्ति का दबाव मांग की तुलना में काफी अधिक होना आवश्यक है, जिसकी संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।

किसानों पर सीमित असर
मौजूदा समय में अधिकांश किसानों द्वारा गेहूं की बिक्री पूरी की जा चुकी है और बाजार में निजी स्टॉक तथा व्यापारिक खरीद का प्रभाव अधिक है। ऐसे में ओएमएसएस नीति का सीधा असर किसानों की आय पर सीमित रहने की संभावना है।
हालांकि, यदि भविष्य में सरकारी बिक्री की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि होती है या नई फसल आने तक लगातार बड़े पैमाने पर गेहूं बाजार में उतारा जाता है, तो कीमतों में कुछ और नरमी आ सकती है।
आगे क्या रह सकती है बाजार की दिशा?
कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि निकट अवधि में गेहूं की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं। सरकारी हस्तक्षेप से अत्यधिक तेजी पर रोक लग सकती है, लेकिन मजबूत उपभोक्ता मांग, नियंत्रित निजी स्टॉक और खाद्य उद्योग की निरंतर खरीद के कारण बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
आने वाले महीनों में OMSS के तहत गेहूं की बिक्री की मात्रा, एफसीआई के स्टॉक की स्थिति और घरेलू मांग का रुझान बाजार की दिशा तय करेगा। यदि सरकार आवश्यकता के अनुसार संतुलित तरीके से गेहूं की आपूर्ति जारी रखती है, तो कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है, जिससे उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को राहत मिलेगी, जबकि बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से भी बचाव होगा।
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