नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): क्रिसिल रिपोर्ट: घरेलू रसोई के बजट पर महंगाई की मार एक बार फिर साफ दिखाई दे रही है। क्रिसिल रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी (Veg) और मांसाहारी (Non-Veg) दोनों ही तरह की थालियों की कीमतों में सालाना (YoY) और मासिक (MoM) आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स की ताजा ‘रोटी राइस रेट’ (RRR) रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में शाकाहारी थाली की लागत में 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत में 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि, इस दौरान रबी की नई फसल आने से आलू के दामों में आई गिरावट ने थाली की लागत को एक सीमित दायरे में रखने में मदद की है।
थाली की लागत: जून 2025 बनाम जून 2026
क्रिसिल रिपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून 2026 में एक आम शाकाहारी थाली की औसत कीमत बढ़कर 28.4 रुपये हो गई है, जो ठीक एक साल पहले (जून 2025 में) 27.1 रुपये थी। दूसरी ओर, मांसाहारी थाली खाने वालों को अब और अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है। मांसाहारी थाली की औसत लागत पिछले साल के 54.8 रुपये से बढ़कर अब 58.2 रुपये प्रति थाली पर पहुंच गई है।
यदि मासिक आधार पर तुलना करें, तो मई 2026 के मुकाबले जून 2026 में शाकाहारी थाली 4 प्रतिशत और मांसाहारी थाली 3 प्रतिशत महंगी हुई है।
क्रिसिल रिपोर्ट: टमाटर और खाद्य तेलों ने बढ़ाई रसोई की तपिश
जून महीने में खाद्य महंगाई को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ टमाटर का रहा। गर्मियों की फसल बुआई में देरी और कुल कृषि रकबे में आई कमी के चलते टमाटर की कीमतें जून 2025 के 32 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर जून 2026 में 42 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं, जो सीधे तौर पर 31 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। मासिक आधार पर भी मई की तुलना में जून में टमाटर के दाम 17 प्रतिशत उछल गए।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा के अनुसार, “टमाटर की कम आपूर्ति के अलावा वैश्विक मोर्चे पर पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। इसी वजह से घरेलू बाजार में खाद्य तेल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी सालाना आधार पर करीब 10-10 प्रतिशत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।”
क्रिसिल रिपोर्ट: अत्यधिक गर्मी से ब्रॉयलर चिकन के दाम बढ़े
मांसाहारी थाली की लागत में 6 प्रतिशत की तेजी आने की मुख्य वजह ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में आया उछाल है, जिसमें सालाना आधार पर लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इस साल देश के कई हिस्सों में पड़ी अत्यधिक और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों में पक्षियों की मृत्यु दर (मोर्टैलिटी रेट) काफी बढ़ गई। इसके साथ ही चूजों का वजन बढ़ने की गति धीमी रही और नए चूजों की प्लेसमेंट प्रभावित हुई। चूंकि ब्रॉयलर चिकन अकेले ही मांसाहारी थाली की कुल लागत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है, इसलिए इसकी कम आपूर्ति ने पूरी थाली को महंगा कर दिया।
क्रिसिल रिपोर्ट: जून 2026 में घरेलू थाली की लागत और प्रमुख कारक
| थाली / खाद्य सामग्री | जून 2025 की कीमत / स्थिति | जून 2026 की कीमत / स्थिति | सालाना बदलाव (YoY %) | मासिक बदलाव (मई vs जून %) |
| शाकाहारी थाली (औसत) | ₹27.1 | ₹28.4 | +5% | +4% |
| मांसाहारी थाली (औसत) | ₹54.8 | ₹58.2 | +6% | +3% |
| टमाटर (प्रति किलोग्राम) | ~₹32 | ~₹42 | +31% | +17% |
| आलू (कीमतें) | ऊंचे स्तर पर | नई फसल से राहत | -14% | +5% |
| ब्रॉयलर चिकन | सामान्य आपूर्ति | गर्मी से आपूर्ति प्रभावित | +7% (अनुमानित) | +2% |
| खाद्य तेल और एलपीजी | सामान्य | आपूर्ति बाधाओं से महंगी | +10% प्रत्येक | स्थिर |

कमजोर मानसून और आगामी महीनों में खाद्य महंगाई की आशंका
क्रिसिल रिपोर्ट: आने वाले दिनों में रसोई के बजट को लेकर चिंताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। 1 जून से 7 जुलाई के बीच देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) से लगभग 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, जुलाई के शुरुआती हफ्ते से मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ी है और यह गुजरात, हरियाणा और पंजाब के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच गया है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और मिट्टी की नमी में सुधार की उम्मीद जागी है।
इसके बावजूद, यदि मुख्य उत्पादक राज्यों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के समय और वितरण में असमानता रहती है, तो खरीफ धान (चावल) की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, उड़द और मूंग जैसी दालों का शुरुआती स्टॉक कम होने और मौसम की मार के कारण कर्नाटक व मध्य प्रदेश में हुए नुकसान से दालों की कीमतें मजबूत रहने के आसार हैं। सीमित रबी स्टॉक के कारण प्याज और कोल्ड स्टोरेज से धीरे-धीरे बाहर आ रहे आलू की कीमतों में भी जुलाई और अगस्त के दौरान हल्की तेजी बनी रह सकती है, जिससे मध्यम अवधि में खाद्य महंगाई का दबाव बने रहने का अनुमान है।
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