नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): डिजिटल फसल सर्वेक्षण: केंद्र सरकार देश में कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण को नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। आगामी खरीफ 2026 सीजन में डिजिटल फसल सर्वेक्षण (Digital Crop Survey-DCS) का दायरा बढ़ाकर लगभग 5.53 लाख गांवों के 45 करोड़ खेतों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य फसल क्षेत्र और उत्पादन का अधिक सटीक आकलन करना, कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना तथा किसानों तक लक्षित सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।
यह पहल केंद्र सरकार की AgriStack और किसान आईडी (Farmer ID) परियोजनाओं के साथ एकीकृत होगी, जिससे कृषि डेटा का एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जा सकेगा।
किसान आईडी और AgriStack से होगा डेटा का एकीकरण
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, अब तक 20 राज्यों में 10.15 करोड़ किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 87 प्रतिशत है। सरकार का मानना है कि किसान आईडी को डिजिटल फसल सर्वेक्षण से जोड़ने पर प्रत्येक किसान और उसकी फसल का प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।
इस एकीकृत प्रणाली से सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंचाने, फसल आधारित सहायता, बीमा, ऋण और अन्य कृषि सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से होगा डेटा का सत्यापन
डिजिटल सर्वेक्षण की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सरकार रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट आधारित तकनीकों का भी उपयोग करेगी। सर्वेक्षण के दौरान जुटाए गए डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान उपग्रह चित्रों से प्राप्त फसल क्षेत्र के आंकड़ों से किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर कम होगा तथा नीति निर्माण के लिए अधिक विश्वसनीय और वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट आधारित सत्यापन से कृषि सांख्यिकी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
रबी के मुकाबले खरीफ में बड़ा विस्तार
डिजिटल फसल सर्वेक्षण का दायरा इस बार पिछले रबी सीजन की तुलना में काफी बड़ा होगा।
| सीजन | गांव | खेत |
|---|---|---|
| रबी (पिछला सीजन) | 4.41 लाख | 31.3 करोड़ |
| खरीफ 2026 (लक्ष्य) | 5.53 लाख | 45 करोड़ |
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण से लगभग वास्तविक समय (Near Real Time) में फसल क्षेत्र और उत्पादन का आकलन करने में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से लागू किया जा रहा है।

किसानों को मिलेगी व्यक्तिगत कृषि सलाह
सरकार भविष्य में डिजिटल फसल सर्वेक्षण और किसान आईडी के आधार पर किसानों को व्यक्तिगत कृषि सलाह (Personalised Advisory) उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है।
इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को उनकी भूमि, फसल, मौसम, मिट्टी की स्थिति और पोषक तत्वों की आवश्यकता के अनुरूप डिजिटल माध्यम से सलाह भेजी जा सकेगी। साथ ही सरकारी योजनाओं, कृषि तकनीकों और मौसम संबंधी जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराई जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा-आधारित सलाह से खेती अधिक वैज्ञानिक होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
योजनाओं के क्रियान्वयन में बढ़ेगी पारदर्शिता
किसान आईडी को पहले ही कई सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा चुका है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण के जरिए वास्तविक फसल क्षेत्र और उत्पादन के प्रमाणित आंकड़े उपलब्ध होने पर सब्सिडी, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा सहायता तथा अन्य कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों को फसल उत्पादन, क्षेत्रफल और कृषि रुझानों से जुड़े अद्यतन आंकड़े मिलने से कृषि नीति और खाद्य सुरक्षा से संबंधित निर्णय अधिक सटीक आधार पर लिए जा सकेंगे।
आगे की राह
भारत में कृषि क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में डिजिटल फसल सर्वेक्षण, AgriStack और किसान आईडी को एक साथ जोड़ना एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार खरीफ 2026 में 45 करोड़ खेतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो जाता है, तो इससे न केवल कृषि आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि किसानों तक सरकारी सेवाओं और तकनीकी सलाह की पहुंच भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी। हालांकि, इस पहल की सफलता राज्यों के बीच समन्वय, डेटा की शुद्धता, गोपनीयता और किसानों की व्यापक भागीदारी पर भी निर्भर करेगी।
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