नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): फोर्स्ड-लेबर टैरिफ: अमेरिका ने भारत के लिए राहत भरा फैसला लेते हुए सेक्शन 301 के तहत प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत फोर्स्ड-लेबर (Forced Labour) टैरिफ को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद लिया गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने 23 जुलाई को जांच के अंतिम निष्कर्ष जारी करते हुए बताया कि नए शुल्क 24 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे और सेक्शन 122 के तहत लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ का स्थान लेंगे।
इसका अर्थ है कि भारत के अधिकांश निर्यात पर फिलहाल अतिरिक्त शुल्क 10 प्रतिशत ही रहेगा, जबकि प्रारंभिक प्रस्ताव में इसे 12.5 प्रतिशत करने की बात कही गई थी।
भारत को क्यों मिली राहत?
यूएसटीआर के अनुसार, दुनिया की 60 अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा में पाया गया कि वे फोर्स्ड-लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने या उसके अनुपालन को सुनिश्चित करने में पर्याप्त सफल नहीं हैं।
इनमें से भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित 17 देशों को 10 प्रतिशत शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया है, जबकि बाकी 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत का शुल्क लागू किया जाएगा।
भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखने का प्रमुख कारण यह माना गया कि उसने 14 जून 2026 को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। यूएसटीआर ने इसे सकारात्मक नीतिगत सुधार माना।
किन उत्पादों पर नहीं लगेगा नया शुल्क?
अमेरिका ने कुछ उत्पादों को नए सेक्शन 301 टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें शामिल हैं—
- ऐसे कृषि इनपुट और कच्चा माल जिनका पर्याप्त उत्पादन अमेरिका में नहीं होता।
- वे उत्पाद जिन पर शुल्क लगाने से अमेरिकी बाजार में महंगाई बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने का जोखिम है।
- अमेरिका के मुक्त व्यापार समझौतों USMCA और कुछ CAFTA-DR देशों के तहत आने वाले पात्र उत्पाद।
इसके अलावा यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के लिए यह शुल्क नेट-ऑफ-एमएफएन (MFN) आधार पर लागू किया जाएगा, ताकि कुल आयात शुल्क निर्धारित सीमा से अधिक न हो।
फोर्स्ड-लेबर टैरिफ: भारतीय निर्यात पर क्या होगा असर?
नए अमेरिकी शुल्क ढांचे में भारतीय निर्यात को तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
| श्रेणी | प्रमुख उत्पाद | शुल्क व्यवस्था |
|---|---|---|
| सेक्शन 232 | इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटो कंपोनेंट्स | एमएफएन शुल्क के अलावा 25% या 50% अतिरिक्त शुल्क |
| छूट प्राप्त उत्पाद | सीमित वस्तुएं | केवल सामान्य एमएफएन शुल्क |
| सेक्शन 301 | इंजीनियरिंग, वस्त्र, रसायन, मशीनरी, प्लास्टिक, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, फर्नीचर आदि | एमएफएन शुल्क के अलावा 10% अतिरिक्त शुल्क |
सरकारी और उद्योग सूत्रों के अनुसार, भारत के कुल निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा तीसरी श्रेणी में आता है, जिस पर नया 10 प्रतिशत फोर्स्ड-लेबर टैरिफ लागू होगा।
GTRI ने टैरिफ पर उठाए सवाल
थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने अमेरिकी फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत पर लगाया गया 10 प्रतिशत फोर्स्ड-लेबर टैरिफ किसी ठोस तथ्यात्मक आधार पर आधारित नहीं है।
GTRI का कहना है कि अमेरिका यह साबित नहीं कर पाया है कि भारत फोर्स्ड-लेबर से बने उत्पादों का आयात करता है। इसके विपरीत, भारत पहले ही अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर ऐसे उत्पादों के आयात पर रोक लगा चुका है।
संस्था के अनुसार, भारतीय संविधान और श्रम कानून भी घरेलू उत्पादन में जबरन श्रम को प्रतिबंधित करते हैं। ऐसे में यह शुल्क श्रम सुधारों से अधिक अमेरिकी टैरिफ नीति को जारी रखने का माध्यम प्रतीत होता है।

फोर्स्ड-लेबर टैरिफ: टेक्सटाइल क्षेत्र को नहीं मिली विशेष राहत
नए नियमों के तहत भारत को टेक्सटाइल एवं परिधान टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) का लाभ नहीं मिलेगा। फोर्स्ड-लेबर टैरिफ में छूट केवल बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों के उन वस्त्र एवं परिधान निर्यातों पर लागू होगी, जिनमें अमेरिकी मूल का कपास या फाइबर इस्तेमाल किया गया है।
इसका अर्थ है कि भारतीय वस्त्र एवं परिधान निर्यातकों को अन्य एशियाई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में इस मामले में कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिलेगी।
व्यापार संबंधों पर क्या होगा असर?
हालांकि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत की जगह 10 प्रतिशत फोर्स्ड-लेबर टैरिफ लागू करना भारत के लिए आंशिक राहत माना जा रहा है, लेकिन भारतीय निर्यातकों को अब भी अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से इंजीनियरिंग सामान, रसायन, मशीनरी, वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा और रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर इसका असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर जारी वार्ताओं का परिणाम भविष्य में इन शुल्कों के स्वरूप और व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इन ख़बरों को भी पढ़ें…
भारत का इलायची निर्यात तीन गुना बढ़कर 43.68 करोड़ डॉलर
कमजोर मानसून से खरीफ बुवाई को झटका, रकबा 21% घटा; तिलहन और कपास में बड़ी गिरावट
प्याज बफर स्टॉक खरीद को रफ्तार देने के लिए केंद्र ने बढ़ाई खरीद कीमत
किसानों से महंगा धान, इथेनॉल कंपनियों को सस्ता चावल! सरकार की OMSS नीति पर बड़े सवाल
प्याज किसानों को राहत; केंद्र ने बढ़ाया न्यूनतम खरीद मूल्य, 16.50 रुपये किलो पर होगी खरीद