नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): अमेरिका का नया टैरिफ दबाव – अमेरिका ने वैश्विक व्यापार नीति के तहत एक नया कदम उठाते हुए भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी प्रशासन के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) वार्ताओं पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने सेक्शन 301 के तहत यह प्रस्ताव पेश किया है। इसके अनुसार भारत सहित 48 अर्थव्यवस्थाओं के आयात पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाने का सुझाव दिया गया है, जबकि कुछ देशों के लिए यह दर 10 प्रतिशत प्रस्तावित की गई है।
जबरन श्रम से जुड़ी चिंताओं के आधार पर कार्रवाई
यूएसटीआर ने मार्च 2026 में जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता (ओवरकैपेसिटी) से संबंधित चिंताओं को लेकर विभिन्न देशों के खिलाफ जांच शुरू की थी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर अब अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत पर प्रस्तावित कार्रवाई इस आरोप पर आधारित नहीं है कि भारतीय निर्यातक जबरन श्रम का उपयोग करते हैं। इसके बजाय अमेरिका यह जांच कर रहा है कि क्या भारत और अन्य देश तीसरे देशों में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण पारंपरिक व्यापार जांच के दायरे से अलग है और इससे कई कानूनी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
किन देशों पर कितना शुल्क प्रस्तावित?
यूएसटीआर के प्रस्ताव के अनुसार, कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान जैसे देशों के आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया है। वहीं भारत और चीन सहित 48 अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है।
कुछ टेक्सटाइल उत्पादों के लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क का संकेत दिया गया है, हालांकि इनकी टैरिफ की अंतिम दरें अभी तय नहीं हुई हैं।
| श्रेणी | प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क |
|---|---|
| भारत, चीन सहित 48 देश | 12.5% |
| कनाडा, यूरोपीय संघ, मैक्सिको, पाकिस्तान आदि | 10% |
| कुछ टेक्सटाइल उत्पाद | अंतिम निर्णय शेष |
टैरिफ: सार्वजनिक परामर्श के बाद होगा अंतिम फैसला
फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। यूएसटीआर ने सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इच्छुक पक्ष 22 जून 2026 तक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लिखित टिप्पणियां 6 जुलाई 2026 तक जमा की जा सकती हैं, जबकि सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई को आयोजित होगी।
व्यापार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंतिम निर्णय जुलाई 2026 के अंत तक सामने आ सकता है। मंजूरी मिलने पर शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू किए जा सकते हैं।
भारत उठा सकता है कानूनी चुनौती
व्यापार कानून विशेषज्ञों का कहना है कि प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हो सकते। उनका तर्क है कि अमेरिका की बाउंड ड्यूटी प्रतिबद्धताओं से अधिक शुल्क लगाना डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
इसके अलावा, सेक्शन 301 का मूल उद्देश्य अमेरिकी कंपनियों को विदेशी बाजारों में आने वाली बाधाओं की जांच करना है। आलोचकों का कहना है कि किसी देश की आयात नीति को आधार बनाकर व्यापक शुल्क लगाना इस प्रावधान के मूल दायरे से बाहर जाता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत इस जांच के कानूनी आधार और दायरे को चुनौती दे सकता है तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत तरीके से रख सकता है।

बीटीए वार्ता पर दबाव की रणनीति?
व्यापार नीति विशेषज्ञों और थिंक टैंक Global Trade Research Initiative (GTRI) का मानना है कि यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं पर दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
जीटीआरआई के अनुसार, अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भारत पर अतिरिक्त दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। संस्था का कहना है कि भारत को सेक्शन 301 जांच और बीटीए वार्ताओं को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखना चाहिए तथा किसी भी समझौते में अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि अमेरिका भविष्य में अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता जैसे अन्य मुद्दों पर भी सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई करता है, तो भारत को उसके लिए भी तैयार रहना होगा।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा- अमेरिका से जारी है संवाद
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत सेक्शन 301 प्रक्रिया के तहत अमेरिका के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित शुल्क (टैरिफ) अभी अंतिम नहीं हैं और परामर्श प्रक्रिया जारी है।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश फरवरी 2026 में घोषित संयुक्त बयान के अनुरूप एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं, तो इसका असर भारत के निर्यातकों पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले भारत के पास अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और अमेरिकी प्रशासन को अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मौजूद है।
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