पटना, (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार का मखाना – बिहार का प्रसिद्ध मखाना अब ऑस्ट्रेलिया के बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने जा रहा है। राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में पटना जिले के बिहटा स्थित सिकंदरपुर BIADA परिसर से पहली बार मखाने की सात कंटेनरों की बड़ी खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना की गई। इस ऐतिहासिक निर्यात को बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। माना जा रहा है कि यह पहल बिहार के मखाना उद्योग, किसानों और कृषि निर्यात के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित होगी।
बिहार पहले से ही देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। अब ऑस्ट्रेलिया जैसे नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनने से राज्य के कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है।
कोलकाता बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए पहुंचेगी ऑस्ट्रेलिया
जानकारी के अनुसार, नियाड ग्रुप की ओर से तैयार की गई यह खेप जितवन सप्लाई चेन के माध्यम से निर्यात की जा रही है। बिहटा से रवाना होने के बाद कंटेनर पहले कोलकाता बंदरगाह पहुंचेंगे। वहां से समुद्री जहाज के जरिए इन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजा जाएगा।
यह पहली बार है जब बिहटा से सीधे इतने बड़े पैमाने पर मखाने की खेप ऑस्ट्रेलिया निर्यात की जा रही है। इससे बिहार के कृषि उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने की संभावना बढ़ गई है।
बिहार पैदा करता है देश का 90 प्रतिशत मखाना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार की उपज अब दुनिया के प्रमुख बाजारों तक पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि देश में उत्पादित होने वाले कुल मखाने का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बिहार में ही पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले बिहार का मखाना उत्तरी अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी अपनी पहचान बना चुका है। अब ऑस्ट्रेलिया में निर्यात शुरू होने से राज्य के किसानों, प्रोसेसिंग इकाइयों और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
बिहार का मखाना: किसानों और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि मखाने के निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहेगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
इसके साथ ही मखाने की सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयों को भी अधिक रोजगार और कारोबार मिलेगा। निर्यात बढ़ने से बिहार का कृषि आधारित उद्योग मजबूत होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
श्रमिकों ने उठाई बेहतर सुविधाओं की मांग
निर्यात की इस उपलब्धि के बीच मखाना उद्योग से जुड़े श्रमिकों ने अपनी समस्याओं को भी सरकार के सामने रखा। दरभंगा जिले के बेनीपुर से आए महिला और पुरुष श्रमिकों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ये श्रमिक मखाना फोड़ने और उसके प्रसंस्करण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़े हैं।
कार्यक्रम में मौजूद दुर्गा सहनी, नुनु सहनी, हीरालाल सहनी, कंचन देवी, गौरी देवी और जीवछी देवी समेत कई श्रमिकों ने कहा कि उद्योग का विस्तार हो रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले मजदूरों को अभी भी बेहतर मजदूरी, रोजगार की स्थिरता और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि निर्यात बढ़ने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं।
बिहार के कृषि निर्यात को मिलेगी नई पहचान
ऑस्ट्रेलिया को पहली बार मखाने की बड़ी खेप भेजा जाना बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मखाने की मांग लगातार बढ़ती है, तो आने वाले समय में राज्य से अन्य देशों को भी बड़े पैमाने पर निर्यात का रास्ता खुलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता, आधुनिक प्रोसेसिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स के सहारे बिहार का मखाना वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य के कृषि निर्यात को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

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