नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): ग्रामीण विकास: केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि जारी करने की घोषणा की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में यह जानकारी दी।
यह राशि वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित प्रावधानों के तहत जारी की जा रही है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आधारभूत ढांचे के विकास और स्थानीय स्तर पर परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी।
नई व्यवस्था में श्रमिकों के हित सर्वोपरि
बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने कहा कि 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था का संक्रमण पूरी तरह सुचारू और श्रमिक-केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रमिक को एक दिन के लिए भी रोजगार से वंचित नहीं होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह केवल किसी सरकारी योजना का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका और जीवन से जुड़ा विषय है। इसलिए राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि रोजगार सृजन, मजदूरी भुगतान और श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
उन्होंने राज्यों से नई प्रणाली को समय पर लागू करने और सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी करने का आग्रह किया।
1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल आवंटन
चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार पहले ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 30,000 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। अब 95,692.31 करोड़ रुपये की अतिरिक्त अंतरिम राशि जारी होने के बाद ग्रामीण रोजगार और विकास के लिए कुल आवंटन 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और टिकाऊ विकास कार्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किन राज्यों को मिली कितनी राशि?
जारी राशि में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है। इसके बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को भी बड़ी धनराशि आवंटित की गई है।
| राज्य | आवंटित राशि (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 12,221.48 |
| पश्चिम बंगाल | 8,508.00 |
| तमिलनाडु | 7,957.57 |
| आंध्र प्रदेश | 7,707.21 |
| राजस्थान | 7,581.87 |
| बिहार | 6,715.83 |
| मध्य प्रदेश | 6,252.03 |
| कर्नाटक | 5,709.09 |
चौहान ने कहा कि यह धनराशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं को तेजी मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
डिजिटल प्रणालियों में राज्यों की प्रगति
नई व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कई राज्यों ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणालियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने जानकारी दी कि 26 राज्यों ने ‘विकसित भारत–ग्रामीण भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बजटीय प्रावधान भी कर लिए हैं। इससे नई प्रणाली के क्रियान्वयन में मदद मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

राज्यों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश
बैठक में चौहान ने राज्यों से जल्द से जल्द आवश्यक अधिसूचनाएं जारी करने, पर्याप्त विकास कार्यों को पूर्व स्वीकृति देने और 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने जिला और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकास कार्यों का चयन ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के माध्यम से किया जाएगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।
राष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी का आह्वान
चौहान ने सभी राज्यों को 28 और 29 जून को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्यों के सहयोग से यह पहल ग्रामीण भारत के विकास, टिकाऊ रोजगार सृजन और करोड़ों लोगों की आजीविका सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ग्रामीण विकास विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी वित्तीय सहायता से ग्राम पंचायत स्तर पर आधारभूत ढांचे के निर्माण, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जिससे विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी।
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