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खरीफ 2026 में जैविक खाद की मांग में रिकॉर्ड उछाल, किसानों ने खरीदी 11.17 लाख टन खाद

जैविक खाद

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): जैविक खाद की मांग: खरीफ 2026 सीजन में देशभर के किसानों के बीच जैविक खाद के उपयोग को लेकर उल्लेखनीय रुझान देखने को मिला है। चालू खरीफ सीजन में किसानों ने 11.17 लाख टन जैविक खाद खरीदी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में खरीदी गई 3.20 लाख टन खाद की तुलना में लगभग साढ़े तीन गुना अधिक है। कृषि क्षेत्र के जानकार इसे टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जैविक खाद की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक पोषक तत्वों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और खेती की लागत को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

जैविक खाद: किन राज्यों में सबसे अधिक हुई खरीद?

केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जैविक खाद की खरीद में उत्तर भारत और पश्चिम भारत के कई राज्यों ने अग्रणी भूमिका निभाई है। सबसे अधिक खरीद पंजाब और उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई।

राज्यजैविक खाद खरीद (लाख टन)
पंजाब2.83
उत्तर प्रदेश2.71
हरियाणा1.33
मध्य प्रदेश1.25
गुजरात0.96
महाराष्ट्र0.84

इन छह राज्यों का कुल योगदान देश में जैविक खाद की कुल खरीद का बड़ा हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और मृदा स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों के प्रभाव से किसानों में जैविक खाद के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

उर्वरक आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण रासायनिक उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत अपनी उर्वरक आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।

देश के कई हिस्सों से किसानों को उर्वरक उपलब्धता में कठिनाइयों की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

खरीफ सीजन के लिए संशोधित की गई उर्वरक आवश्यकता

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन किया है। पहले जहां लगभग 390.5 लाख टन उर्वरकों की खपत का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे घटाकर 383.9 लाख टन कर दिया गया है।

सरकार के अनुसार, मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए यह संशोधन किया गया है।

प्रमुख उर्वरकों की संशोधित आवश्यकता

उर्वरकपूर्व अनुमान (लाख टन)संशोधित अनुमान (लाख टन)
यूरिया194.0190.3
डीएपी59.156.2

उर्वरक मांग में यह संशोधन संभावित मौसम परिस्थितियों और फसल क्षेत्र के आकलन के आधार पर किया गया है।

जैविक खाद
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पर्याप्त भंडार होने का दावा

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में वर्तमान समय में 197.56 लाख टन उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है। यह कुल अनुमानित आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है। सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक उर्वरकों का भंडार कुल आवश्यकता के लगभग 33 प्रतिशत के बराबर रहता है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7 जून 2026 तक किसानों ने खरीफ सीजन के लिए 86.65 लाख टन रासायनिक उर्वरकों की खरीद कर ली है, जो कुल अनुमानित आवश्यकता का 22.57 प्रतिशत है।

आयात और नई खरीद प्रक्रिया जारी

सरकार ने बताया कि जून माह के दौरान 25 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा 17 लाख टन यूरिया की खरीद के लिए नई वैश्विक निविदा प्रक्रिया भी जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों से आगामी महीनों में उर्वरकों की उपलब्धता और मजबूत होगी तथा किसानों को खरीफ सीजन के दौरान किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

टिकाऊ खेती की ओर बढ़ते कदम

जैविक खाद की मांग में हुई रिकॉर्ड वृद्धि यह दर्शाती है कि किसान अब मृदा स्वास्थ्य और दीर्घकालिक उत्पादकता पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। यदि यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में देश में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है। वहीं सरकार के लिए भी यह संकेत है कि जैविक इनपुट्स की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों को और मजबूत किया जाए।

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