नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): USDA जुलाई रिपोर्ट 2026-27: अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने वर्ष 2026-27 के लिए जुलाई में जारी World Agricultural Production (WAP) रिपोर्ट में वैश्विक कृषि उत्पादन के अनुमानों में सीमित लेकिन महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रतिकूल मौसम और कुछ प्रमुख उत्पादक देशों में फसल परिस्थितियों के चलते गेहूं, चावल और मोटे अनाज (Coarse Grains) के वैश्विक उत्पादन अनुमान में कटौती की गई है। दूसरी ओर, तिलहन और कपास उत्पादन के अनुमान को बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।
भारत के लिए यह रिपोर्ट सकारात्मक संकेत देती है। USDA ने देश के गेहूं, चावल और मक्का उत्पादन के अपने पूर्वानुमानों में कोई बदलाव नहीं किया है। विशेष रूप से गेहूं उत्पादन 12.10 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है।
USDA रिपोर्ट: वैश्विक उत्पादन अनुमान में मामूली बदलाव
USDA की जुलाई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक गेहूं उत्पादन का अनुमान जून के 82.01 करोड़ टन से घटाकर 82.00 करोड़ टन कर दिया गया है। इसी तरह मोटे अनाज का अनुमान 159.45 करोड़ टन से घटकर 159.20 करोड़ टन और चावल का उत्पादन 53.72 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
हालांकि तिलहन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 72 करोड़ टन कर दिया गया है, जबकि वैश्विक कपास उत्पादन 11.73 करोड़ गांठ रहने का अनुमान लगाया गया है।
| फसल | जून अनुमान | जुलाई अनुमान |
|---|---|---|
| गेहूं | 82.01 करोड़ टन | 82.00 करोड़ टन |
| चावल | 53.78 करोड़ टन | 53.72 करोड़ टन |
| मोटे अनाज | 159.45 करोड़ टन | 159.20 करोड़ टन |
| तिलहन | बढ़ाया गया | 72 करोड़ टन (रिकॉर्ड) |
| कपास | संशोधित | 11.73 करोड़ गांठ |
भारत का गेहूं उत्पादन रहेगा रिकॉर्ड स्तर पर: USDA
USDA ने भारत के गेहूं उत्पादन का अनुमान 12.10 करोड़ टन पर बरकरार रखा है। यह पिछले वर्ष के 11.80 करोड़ टन से अधिक होगा और अब तक का सर्वाधिक उत्पादन माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार गेहूं का रकबा बढ़कर 3.35 करोड़ हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जबकि औसत उत्पादकता 3.61 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है। बेहतर बुवाई क्षेत्र और उत्पादकता में सुधार इस रिकॉर्ड उत्पादन की प्रमुख वजह माने जा रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर चीन 14.10 करोड़ टन उत्पादन के साथ सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक बना रहेगा। इसके बाद यूरोपीय संघ (13.60 करोड़ टन), रूस (8.85 करोड़ टन), कनाडा (3.40 करोड़ टन) और ऑस्ट्रेलिया (2.80 करोड़ टन) का स्थान रहेगा। रूस में अनुकूल मौसम से उत्पादन बेहतर हुआ है, जबकि कनाडा में किसानों द्वारा कैनोला और जौ की खेती बढ़ाने से गेहूं उत्पादन घटने का अनुमान है।
चावल उत्पादन में भारत शीर्ष पर कायम
USDA ने भारत का चावल उत्पादन (मिल्ड आधार) 15 करोड़ टन रहने का अनुमान बरकरार रखा है। यह पिछले वर्ष के स्तर के बराबर है और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनाए रखेगा।
वैश्विक चावल उत्पादन का अनुमान जून के 53.78 करोड़ टन से घटाकर 53.72 करोड़ टन कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 54.57 करोड़ टन से भी कम है।
चीन का उत्पादन 14.70 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश, इंडोनेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और पाकिस्तान भी प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल रहेंगे।
मक्का और मोटे अनाज पर मौसम की मार
भारत का मक्का उत्पादन 5.20 करोड़ टन पर स्थिर रहने का अनुमान है, हालांकि यह पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 5.51 करोड़ टन से कम रहेगा। मक्का का रकबा 1.44 करोड़ हेक्टेयर और औसत उत्पादकता 3.61 टन प्रति हेक्टेयर रहने की संभावना है।
दुनिया का मक्का उत्पादन घटाकर 129.71 करोड़ टन कर दिया गया है। यूरोप, विशेषकर फ्रांस में सूखे और अत्यधिक गर्मी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। वहीं अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका में अनुकूल मौसम ने उत्पादन को सहारा दिया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान में बाढ़ और केन्या में सूखे से उत्पादन पर असर पड़ा है।
भारत का कुल मोटा अनाज उत्पादन 7.13 करोड़ टन रहने का अनुमान है। हालांकि रकबा बढ़ा है, लेकिन औसत उत्पादकता में कमी के कारण उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4.4 प्रतिशत कम रह सकता है।
तिलहन और कपास में बेहतर संभावनाएं
USDA ने वैश्विक तिलहन उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर रिकॉर्ड 72 करोड़ टन कर दिया है। भारत का तिलहन उत्पादन 4.30 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 4.18 करोड़ टन से अधिक होगा।
रूस में रिकॉर्ड सूरजमुखी उत्पादन, ब्राजील में तिलहन उत्पादन में वृद्धि और कनाडा में जैव ईंधन की बढ़ती मांग के कारण रेपसीड के रकबे में विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख कारण बताए गए हैं।

भारत का कपास उत्पादन 2.40 करोड़ (480 पाउंड) गांठ रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 2.38 करोड़ गांठ से थोड़ा अधिक होगा। वहीं वैश्विक कपास उत्पादन बढ़कर 11.73 करोड़ गांठ पहुंचने का अनुमान है, जिसमें ब्राजील का योगदान उल्लेखनीय रहेगा।
भारत के लिए सकारात्मक, दुनिया के लिए मिश्रित संकेत
USDA की जुलाई 2026-27 रिपोर्ट वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए मिश्रित तस्वीर पेश करती है। प्रतिकूल मौसम के चलते गेहूं, चावल, मक्का और मोटे अनाज के वैश्विक उत्पादन अनुमानों में कमी की गई है। इसके विपरीत तिलहन और कपास उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि की संभावना दिखाई गई है।
भारत के लिए रिपोर्ट उत्साहजनक है, क्योंकि गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन, चावल में वैश्विक नेतृत्व और तिलहन व कपास उत्पादन में स्थिर वृद्धि देश की कृषि क्षमता को मजबूत संकेत देती है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति और प्रमुख उत्पादक देशों की फसल प्रगति वैश्विक कृषि बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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