नई दिल्ली, 18 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): Crude Oil Price – पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है।
ब्रेंट क्रूड $103.5 प्रति बैरल पर बंद हुआ और लगातार चौथे दिन $100 के ऊपर बना रहा, जबकि इससे पहले यह $106.5 तक पहुंच गया था।
वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) यानी अमेरिकी क्रूड $95 प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है, जिसमें मंगलवार को 3% से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
युद्ध और हमले से बढ़ी अस्थिरता
ईरान के नेशनल सिक्योरिटी प्रमुख अली लारीजानी की इजरायली एयरस्ट्राइक में मौत की पुष्टि के बाद तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना ईरान को तेल सप्लाई बाधित करने के लिए उकसा सकती है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्ग पर।
फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख एरॉन स्टीन के अनुसार, यह स्थिति अमेरिकी नौसेना पर टैंकरों की सुरक्षा के लिए दबाव बढ़ा सकती है, जिससे सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना ग्लोबल चिंता का केंद्र
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा चोकपॉइंट्स में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि जल्द ही जहाजों की आवाजाही बहाल हो सकती है, लेकिन कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है।
उन्होंने NATO सहयोगियों की आलोचना भी की, जिन्होंने इस क्षेत्र में अमेरिकी ऑपरेशन का समर्थन नहीं किया।
कीमतों में उछाल और महंगाई का खतरा
2026 की पहली तिमाही खत्म होने से पहले ही अमेरिकी तेल कीमतों में 60% से ज्यादा उछाल आ चुका है, जिसका बड़ा कारण फरवरी के अंत में शुरू हुआ ईरान संघर्ष है।
इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है—अमेरिका में डीज़ल की कीमतें $5 प्रति गैलन के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ गया है।
यह मुद्दा फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में भी अहम बना हुआ है, जहां ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है।
आगे क्या रहेगा रुख?
वेस्टपैक बैंकिंग कॉर्प के कमोडिटी रिसर्च हेड रॉबर्ट रेनी के मुताबिक, ब्रेंट की नई ट्रेडिंग रेंज $95–$110 प्रति बैरल हो सकती है। अगर रिफाइनरी पर हमले या स्ट्रेट में और माइनिंग की घटनाएं बढ़ती हैं, तो कीमतें $10–$20 और बढ़ सकती हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, सप्लाई बाधाओं का खतरा और वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता—ये सभी फैक्टर मिलकर कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचाई पर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल और वैश्विक महंगाई पर देखने को मिल सकता है।
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