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Wheat Export: भारत ने 4 साल बाद शुरू किया गेहूं एक्सपोर्ट, लेकिन बढ़ोतरी की रफ्तार पर क्यों है संदेह?

Wheat Export India 2026

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Wheat Export- चार साल के लंबे अंतराल के बाद भारत ने वैश्विक गेहूं निर्यात बाजार में वापसी कर ली है। रिकॉर्ड उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती और बेहतर मालभाड़ा दरों ने भारतीय गेहूं को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाया है। एशिया और मध्य-पूर्व के खरीदारों के बीच भारतीय गेहूं की मांग में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की प्रमुख कंपनी ITC Limited ने पश्चिमी तट के कांडला बंदरगाह से लगभग 22,000 मीट्रिक टन गेहूं संयुक्त अरब अमीरात को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पिछले चार वर्षों में बड़े पैमाने पर पहला निर्यात माना जा रहा है।

Wheat Export: 2022 में क्यों लगा था प्रतिबंध?

भारत, जो चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है, ने 2022 में अचानक गेहूं निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसका मुख्य कारण असामान्य गर्मी थी, जिसने फसल को नुकसान पहुंचाया और घरेलू स्टॉक घटा दिया।

Wheat Export
Wheat Export: भारत की वैश्विक गेहूं बाजार में वापसी

इस फैसले का असर यह हुआ कि 2023 और 2024 में भी प्रतिबंध जारी रहा, जिससे घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं। उस समय यह आशंका भी जताई जा रही थी कि भारत को 2017 के बाद पहली बार गेहूं आयात करना पड़ सकता है।

Wheat Export: रिकॉर्ड उत्पादन ने बदला परिदृश्य

पिछले साल बेहतर मौसम और अच्छी खेती के चलते उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे सरकारी भंडार मजबूत हुए और निर्यात की अनुमति देने का रास्ता साफ हुआ।

सरकार ने इस साल की शुरुआत में 2.5 मिलियन टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी, और बाद में इतनी ही अतिरिक्त मात्रा के लिए भी मंजूरी दी। इससे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से प्रवेश का मौका मिला।

कीमतों का गणित: भारत बनाम वैश्विक बाजार

हालांकि निर्यात शुरू हो गया है, लेकिन कीमतों का अंतर भारत के लिए चुनौती बना हुआ है।

स्रोत क्षेत्रअनुमानित कीमत (प्रति टन)स्थिति
भारत~$275 (FOB)महंगा पड़ रहा
ऑस्ट्रेलिया$290–$300 (CIF)प्रतिस्पर्धी
ब्लैक सी क्षेत्र$290–$300 (CIF)मजबूत सप्लाई

भारत का गेहूं वैश्विक बाजार में कम से कम $20 प्रति टन महंगा पड़ रहा है, जिससे बड़े खरीदारों के लिए यह कम आकर्षक बनता है।

फिर भी क्यों हो रही है मांग?

हालिया भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान से जुड़े मुद्दों के कारण शिपिंग लागत में अस्थिरता आई है। इससे कुछ खरीदार, जिन्हें तुरंत आपूर्ति की जरूरत है, भारत की ओर रुख कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, UAE को गेहूं निर्यात (Wheat Export) की डील लगभग $275 प्रति टन (FOB) पर हुई है। यह दर्शाता है कि अल्पकालिक जरूरतों के लिए भारत अभी भी एक व्यवहार्य विकल्प बना हुआ है।

क्यों सीमित रह सकती है एक्सपोर्ट ग्रोथ?

हालांकि भारत ने निर्यात फिर शुरू कर दिया है, लेकिन बड़े पैमाने पर वृद्धि की संभावना कम दिख रही है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतें निर्यात को कम आकर्षक बनाती हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और ब्लैक सी क्षेत्र से सस्ता गेहूं उपलब्ध है।
  • जिन देशों के पास पहले से स्टॉक है, वे महंगा भारतीय गेहूं खरीदने से बचेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वे ही देश भारतीय गेहूं खरीदेंगे जिन्हें 30–45 दिनों के भीतर तत्काल आपूर्ति की जरूरत होगी।

Wheat Export: अवसर तो है, लेकिन सीमित

भारत की गेहूं निर्यात (Wheat Export) बाजार में वापसी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह अभी शुरुआती चरण में है। मौजूदा वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कीमतों के दबाव के चलते निर्यात में तेजी सीमित रह सकती है।

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या भारत अपनी कीमतों को प्रतिस्पर्धी बना पाता है या फिर यह निर्यात केवल सीमित और अवसर आधारित ही रह जाएगा।

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