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सोना 5100 डॉलर के पार: चांदी की रफ्तार तेज, लेकिन क्या अब भी गोल्ड है बेहतर दांव?

मुंबई , 26 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): ग्लोबल बुलियन बाजार में सोने ने एक नया इतिहास रच दिया है। 26 जनवरी को स्पॉट गोल्ड 2.2 फीसदी की तेजी के साथ 5,091.61 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया और सत्र के दौरान 5,100 डॉलर के स्तर को पार कर गया। साल 2025 में सोने ने करीब 64 फीसदी की छलांग लगाई है, जो 1979 के बाद किसी एक साल में सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात बने रहे तो इस साल सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक भी पहुंच सकता है।

लेकिन इसी तेजी के बीच निवेशकों के सामने एक अहम सवाल खड़ा है—क्या अभी भी सोना बेहतर विकल्प है या चांदी में ज्यादा मुनाफे की गुंजाइश बची है?

चांदी की उड़ान और बदला हुआ समीकरण

चांदी ने 2025 में निवेशकों को चौंकाया है। साल भर में यह करीब 147 फीसदी चढ़ चुकी है और 23 जनवरी को 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई थी। इस तेज उछाल का असर गोल्ड-सिल्वर रेशियो पर साफ दिखता है, जो 2026 की शुरुआत में करीब 50 पर आ गया है। कोविड के दौर में यही रेशियो 127 के आसपास था। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इतना नीचे आना इस बात का संकेत है कि चांदी में शॉर्ट टर्म में तेजी कुछ ज्यादा ही हो चुकी है।

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी में आई असाधारण तेजी ने शॉर्ट टर्म का रिस्क-रिवॉर्ड समीकरण बदल दिया है। बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना फिलहाल ज्यादा संतुलित और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहा है।

निवेशक प्रवाह से मिलते हैं अहम संकेत

कीमतों के साथ-साथ इनवेस्टर फ्लो भी तस्वीर साफ कर रहे हैं। जनवरी में चांदी की ऊंची कीमतों के बावजूद करीब 30 लाख औंस का आउटफ्लो देखने को मिला है। इसके उलट, गोल्ड ईटीएफ में लगातार इनफ्लो बना हुआ है। यह दर्शाता है कि निवेशक ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले एसेट से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर बढ़ रहे हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव बड़ी वजह हैं। अमेरिका, ईरान और वेनेजुएला से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं चीन-अमेरिका संबंध भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।

बढ़ती मनी सप्लाई ने दी तेजी को हवा

सोने और चांदी में आई इस तेजी के पीछे बढ़ती वैश्विक लिक्विडिटी भी एक अहम कारण है। अमेरिका की M2 मनी सप्लाई करीब 22 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच चुकी है, जबकि चीन की M2 सप्लाई 340 लाख करोड़ युआन को पार कर गई है, जिसमें सालाना आधार पर लगभग 8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा लिक्विडिटी से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है और निवेशक महंगाई से बचाव के लिए सोने जैसे एसेट्स की ओर रुख करते हैं।

स्थिरता बनाम उतार-चढ़ाव: गोल्ड और सिल्वर की तुलना

पहलूसोना (Gold)चांदी (Silver)
2025 का रिटर्न~64%~147%
उतार-चढ़ावअपेक्षाकृत कमकाफी ज्यादा
निवेशक प्रवाहETF में इनफ्लोहालिया आउटफ्लो
भूमिकासेफ हेवन, हेजइंडस्ट्रियल + निवेश

तो अभी किसमें है ज्यादा फायदा?

लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी का आउटलुक सकारात्मक माना जा रहा है, खासकर इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण। हालांकि, 2025 की तेज छलांग के बाद शॉर्ट टर्म में इसका सेटअप असंतुलित दिखता है। इसके मुकाबले सोना ज्यादा स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

निष्कर्ष यही है कि अगर निवेशक शॉर्ट टर्म में जोखिम कम रखना चाहते हैं तो सोना फिलहाल बेहतर दांव लगता है। वहीं, ज्यादा उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता रखने वाले निवेशकों के लिए चांदी लॉन्ग टर्म में अवसर दे सकती है। मौजूदा दौर में फैसला मुनाफे से ज्यादा जोखिम प्रबंधन पर टिका है।

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