नई दिल्ली, 26 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी कर दी है। इस वर्ष कुल 131 विभूतियों को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाजा जाएगा। इनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं। सूची में 19 महिलाएं और 16 मरणोपरांत सम्मान पाने वाले नाम भी दर्ज हैं।
इस बार पद्म पुरस्कारों में कृषि और ग्रामीण भारत की मजबूत झलक देखने को मिली है। खेती, कृषि अनुसंधान, पशुपालन और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चार किसानों और पांच वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है।
कृषि अनुसंधान को नई पहचान
कृषि विज्ञान के क्षेत्र में जिन पांच नामों को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है, उन्होंने नीति, शोध और किसानों तक तकनीक पहुंचाने के स्तर पर दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ा है।
डॉ. अशोक कुमार सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के पूर्व निदेशक, को बासमती धान की उन्नत किस्मों के विकास के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में विकसित उच्च उपज और रोग-रोधी किस्मों ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई, बल्कि भारत की बासमती चावल की वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया।
डॉ. पी. एल. गौतम, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष, ने किसानों के बीज अधिकारों और पारंपरिक किस्मों के संरक्षण को संस्थागत रूप दिया। उनके प्रयासों से जैव संसाधनों के सतत उपयोग और किसानों के हितों की रक्षा को कानूनी मजबूती मिली।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. के. रामास्वामी ने कृषि शिक्षा और विस्तार सेवाओं को किसानों की जरूरतों से जोड़ने का काम किया। जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीकों पर उनके कार्यकाल में कई अहम पहलें शुरू हुईं।
पूर्वी भारत में कृषि शिक्षा को सशक्त बनाने वाले डॉ. जी. एल. त्रिवेदी, राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रहे हैं। उन्होंने फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि प्रणालियों पर केंद्रित शोध को बढ़ावा देकर स्थानीय किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया।
पशुपालन और पशु चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. एन. पुन्नियमूर्ति का योगदान उल्लेखनीय रहा है। तमिलनाडु पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में डीन रहते हुए उन्होंने दुग्ध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी वैज्ञानिक प्रणालियों को मजबूत किया।
खेत से इनोवेशन तक: किसानों का सम्मान
इस वर्ष पद्म श्री सम्मान पाने वाले किसान केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने नवाचार, संरक्षण और सहकारिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के प्रगतिशील किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री दिया जाएगा। उन्होंने विलुप्त होती सब्जियों की 55 से अधिक किस्मों को संरक्षित किया और लगभग 100 नई किस्में विकसित कर बीज संरक्षण को आंदोलन का रूप दिया।
असम के जोगेश देउरी को मूंगा रेशम के संरक्षण और संवर्धन के लिए सम्मानित किया गया है। उनके प्रयासों से हजारों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ी और असम की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच मिला।
महाराष्ट्र के श्रीरंग देवाबा लाड को कपास उत्पादन बढ़ाने वाली “दादा लाड तकनीक” के लिए जाना जाता है। इस तकनीक से कपास की पैदावार में कई गुना वृद्धि हुई और किसानों की आय में बड़ा सुधार आया।
तेलंगाना के राम रेड्डी मामिडी को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहकारी मॉडल को मजबूत कर किसानों, विशेषकर महिलाओं, को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया।
पर्यावरण संरक्षण को भी राष्ट्रीय मंच
पद्म पुरस्कार 2026 में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र को भी खास स्थान मिला है। केरल की कोल्लक्कायिल देवकी अम्मा को निजी स्तर पर वन विकसित करने और जैव विविधता संरक्षण के लिए सम्मानित किया जाएगा। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में हरित आवरण विकसित कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
पद्म पुरस्कार 2026 की यह सूची स्पष्ट संकेत देती है कि देश की विकास गाथा में किसान, वैज्ञानिक और पर्यावरण संरक्षक समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। खेत, प्रयोगशाला और जंगल—तीनों से निकली यह साधना अब राष्ट्रीय सम्मान के रूप में दर्ज हो गई है।
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