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छत्तीसगढ़ धान घोटाला: सरकारी गोदाम से गायब 26 हजार क्विंटल धान, चूहों पर फोड़ा गया ठीकरा

कवर्धा (छत्तीसगढ़), 09 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने सरकारी धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिले के सरकारी धान प्रोक्योरमेंट सेंटरों से करीब 26,000 क्विंटल धान गायब हो गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस भारी नुकसान के पीछे वजह चूहों, दीमक और कीड़ों को बताया जा रहा है।

दो सरकारी केंद्रों से गायब हुआ धान

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला बाजार चरभट्टा और बघर्रा धान खरीदी केंद्र से जुड़ा है, जहां 2024–25 सीजन में किसानों से खरीदा गया धान संग्रहित किया गया था। जांच में सामने आया कि दोनों केंद्रों को मिलाकर 26 हजार क्विंटल धान का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। सबसे अधिक गड़बड़ी बाजार चरभट्टा केंद्र में पाई गई, जहां अकेले करीब 5 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए केंद्र प्रभारी के खिलाफ उच्चस्तरीय शिकायत दर्ज कराई गई है।

फर्जी रिकॉर्ड और CCTV बंद करने के आरोप

शिकायत में सिर्फ धान की कमी ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप लगाए गए हैं कि धान की आवक-जावक के फर्जी रिकॉर्ड बनाए गए, खरीदी के नाम पर नकली बिल पेश किए गए, मजदूरों की झूठी हाजिरी भरी गई और सबसे गंभीर आरोप यह कि कई अहम मौकों पर CCTV कैमरे जानबूझकर बंद रखे गए, ताकि सच्चाई सामने न आ सके। इन आरोपों ने मामले को साधारण लापरवाही से आगे बढ़ाकर संभावित घोटाले की श्रेणी में ला खड़ा किया है।

अधिकारियों के बयान पर बढ़ा विवाद

जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने स्वीकार किया कि बाजार चरभट्टा केंद्र के प्रभारी प्रीतेश पांडेय को पद से हटा दिया गया है, लेकिन धान के गायब होने के पीछे मौसम और कीटों को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि धान खुले में रखा गया था, जिसे चूहों और दीमक ने नुकसान पहुंचाया।

हालांकि, यही बयान अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बन गया है, क्योंकि लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या चूहे और कीड़े हजारों क्विंटल धान पूरी तरह नष्ट कर सकते हैं?

जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत

मामले की जांच कर रहे सहायक जिला खाद्य अधिकारी मदन साहू ने कहा कि शिकायत बेहद गंभीर है और प्रारंभिक जांच में कई आरोप सही पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 23 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है और अंतिम रिपोर्ट के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि संगठित अनियमितताओं का हो सकता है।

राजनीति भी गरमाई, कांग्रेस का प्रदर्शन

मामला सामने आते ही जिले में सियासत तेज हो गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला विपणन अधिकारी कार्यालय के बाहर चूहेदानी लेकर प्रदर्शन किया और तंज कसते हुए कहा कि अगर चूहों ने करोड़ों का धान खा लिया है, तो पहले उन्हें पकड़ा जाए। पार्टी ने तत्काल FIR दर्ज करने, उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि इस घोटाले में मिलीभगत है और जिम्मेदार अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल: चूहे या घोटाला?

अब कवर्धा से लेकर रायपुर तक लोगों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है— क्या वाकई चूहे और दीमक 8 करोड़ रुपये का धान खा सकते हैं, या फिर यह सब कागजों पर रचा गया एक बड़ा घोटाला है? जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने सरकारी धान खरीदी व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गहरा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।

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