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मल्टी-फ्यूल प्लान ही भविष्य: नितिन गडकरी ने सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए दिया बड़ा रोडमैप

मल्टी-फ्यूल रणनीति से ही संभव सस्टेनेबल मोबिलिटी

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): मल्टी-फ्यूल प्लान – केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत में सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की बढ़ती ऊर्जा और परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी एक तकनीक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। इसके बजाय, इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे विभिन्न विकल्पों को मिलाकर एक मल्टी-फ्यूल रणनीति अपनानी होगी।

मल्टी-फ्यूल प्लान: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में जरूरी बदलाव

नई दिल्ली में Green Transport Conclave 2026 के दौरान गडकरी ने कहा कि भारत अपनी लगभग 87 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है। यह स्थिति न केवल आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करती है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए देश को वैकल्पिक ईंधनों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल को समान महत्व देना होगा, ताकि एक संतुलित और टिकाऊ ऊर्जा ढांचा तैयार किया जा सके।

मल्टी-फ्यूल प्लान: वैकल्पिक ईंधनों और बायोमास की भूमिका

गडकरी ने आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग और डाइमिथाइल ईथर (DME) जैसे उभरते ईंधनों की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये विकल्प पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मल्टी-फ्यूल प्लान
मल्टी-फ्यूल प्लान: EV-चार्जिंग-स्टेशन

इसके साथ ही, उन्होंने बायोमास आधारित समाधानों पर विशेष जोर दिया। प्रेस मड और स्पेंट वॉश जैसे औद्योगिक सह-उत्पादों से तैयार जैविक खाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने उद्योग और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से बायोमास उत्पादकता बढ़ाने का आह्वान किया।

मोबिलिटी अब केवल इलेक्ट्रिक तक सीमित नहीं

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद मनोज कुमार सिंह ने भी भारत की बदलती मोबिलिटी रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब देश की परिवहन नीति केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक समेकित, बहु-मोडल और बहु-ईंधन ढांचे की ओर विकसित हो रही है।

उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों, जैव ईंधन, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और ग्रीन लॉजिस्टिक्स के एकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की परिवहन प्रणाली को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

नई तकनीकों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर

सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने कम कार्बन उत्सर्जन वाली परिवहन नीतियों, सतत शहरी गतिशीलता और ग्रामीण परिवहन के डीकार्बोनाइजेशन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।

इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन और एकीकृत ईंधन इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों के जरिए परिवहन क्षेत्र को अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

बायोचार और बायो-बिटुमेन को बढ़ावा

इस दो दिवसीय सम्मेलन की एक अहम उपलब्धि CSIR-Central Road Research Institute और Indian Federation of Green Energy के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर रही। इस समझौते का उद्देश्य सड़क निर्माण में बायोचार और बायो-बिटुमेन के उपयोग को बढ़ावा देना है।

यह पहल न केवल पर्यावरण के अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि देश के बुनियादी ढांचे को भी अधिक टिकाऊ बनाएगी। सम्मेलन में ऑटोमोबाइल, बायोएनर्जी, एविएशन और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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