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Wheat Procurement: यूपी में गेहूं खरीद 34% घटी, जटिल प्रक्रियाओं में उलझे किसान; अब मानकों में ढील से राहत की उम्मीद

खरीद प्रक्रिया में उलझे किसान, यूपी में 34% कम हुई गेहूं खरीद

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Wheat Procurement- उत्तर प्रदेश में इस साल गेहूं की सरकारी खरीद में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 23 अप्रैल तक प्रदेश में केवल 3.64 लाख टन गेहूं की खरीद हो सकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 5.51 लाख टन था। यानी इस बार खरीद में लगभग 34 प्रतिशत की कमी आई है। देश में रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के बावजूद यह गिरावट कई सवाल खड़े करती है।

तकनीकी अड़चनें और मौसम की मार

गेहूं खरीद (Wheat Procurement) में गिरावट के पीछे दो प्रमुख कारण सामने आए हैं—पहला, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान, और दूसरा, खरीद प्रक्रिया में आई जटिल तकनीकी बाधाएं। इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे कई किसानों को समय पर अपनी उपज बेचने में कठिनाई हुई।

Wheat Procurement
Wheat Procurement: यूपी गेहूं खरीद 34 फीसदी कम

खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जहां 98,588 किसानों ने सरकारी एजेंसियों को एमएसपी पर गेहूं बेचा था, वहीं इस साल यह संख्या घटकर 67,482 रह गई है। यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में किसान खरीद प्रक्रिया से बाहर रह गए।

मुजफ्फरनगर के एक किसान ने बताया कि उन्हें गेहूं बेचने के लिए लेखपाल से लेकर तहसील कार्यालय तक कई चक्कर लगाने पड़े। कई खरीद केंद्रों पर तौल व्यवस्था की कमी भी सामने आई, जिससे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

Wheat Procurement: सरकार ने दी प्रक्रियाओं में ढील

किसानों की परेशानियों को देखते हुए राज्य सरकार ने अब नियमों में कुछ राहत दी है। 30 अप्रैल तक किसानों को बिना फार्मर रजिस्ट्री और भूमि सत्यापन के भी अपनी उपज बेचने की अनुमति दे दी गई है। अब केंद्र प्रभारी स्वयं दस्तावेजों की जांच कर खरीद कर सकते हैं।

इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी उपज सत्यापन प्रक्रिया में फंसी हुई थी। सरकार का मानना है कि इससे खरीद की गति में तेजी आएगी और अधिक किसान एमएसपी का लाभ उठा सकेंगे।

Wheat Procurement: गुणवत्ता मानकों में भी छूट

बेमौसम बारिश से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने खरीद मानकों में भी ढील दी है। लस्टर लॉस (चमक में कमी) की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर दी गई है।

इस निर्णय से उन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनकी फसल मौसम की मार से प्रभावित हुई है। हालांकि, ऐसे गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और उसका उपयोग केवल राज्य के भीतर ही किया जाएगा।

भंडारण और जिम्मेदारी राज्य की

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिथिल मानकों के तहत खरीदे गए गेहूं के भंडारण की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। यदि गुणवत्ता में और गिरावट होती है, तो इसकी जवाबदेही भी राज्य पर ही तय होगी।

सरकार के इन कदमों से निश्चित रूप से खरीद प्रक्रिया (Wheat Procurement Process)में सुधार की उम्मीद है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन फैसलों का प्रभाव कितना होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, लाखों किसान इस राहत का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।

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