[polylang_langswitcher]

गेहूं खरीद की सुस्त शुरुआत, लक्ष्य पर संकट: बेमौसम बारिश से प्रभावित हुआ रबी सीजन

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 के तहत गेहूं खरीद की शुरुआत अपेक्षा से काफी धीमी रही है, जिससे सरकार और किसानों दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। 1 अप्रैल से शुरू हुए खरीद सीजन में 16 अप्रैल तक कुल 51.34 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि में हुई 83.57 लाख टन खरीद के मुकाबले लगभग 38 प्रतिशत कम है।

इस गिरावट का सीधा असर सरकारी भंडारण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ सकता है, खासकर तब जब सरकार ने इस वर्ष 303 लाख टन खरीद का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

बेमौसम बारिश बना मुख्य कारण

मार्च और अप्रैल के दौरान कई प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में हुई बेमौसम बारिश ने फसल की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया। कटाई के समय बारिश होने से गेहूं में नमी बढ़ गई, दाने सिकुड़ गए और चमक (लस्टर) में कमी आई।

इन कारणों से बड़ी मात्रा में फसल निर्धारित गुणवत्ता मानकों से बाहर हो गई, जिसके चलते मंडियों में किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर गेहूं खरीद प्रक्रिया भी धीमी रही, जिससे आवक और खरीद दोनों प्रभावित हुए।

राज्यों में गेहूं खरीद की स्थिति

16 अप्रैल तक पंजाब में 5.94 लाख टन और हरियाणा में 37.74 लाख टन गेहूं खरीद हुई। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद की शुरुआत देरी से होने के कारण महज 3.43 लाख टन गेहूं खरीदा गया। उत्तर प्रदेश में 1.62 लाख टन और राजस्थान में 2.52 लाख टन गेहूं खरीद हुई है।गेहूं खरीद

गेहूं खरीद में सुस्ती से बढ़ी चिंताहरियाणा इस बार खरीद में सबसे आगे रहा है, जबकि पंजाब, जो आमतौर पर अग्रणी रहता है, वहां खरीद अपेक्षाकृत धीमी रही। मध्य प्रदेश में खरीद की शुरुआत देर से होने के कारण आंकड़े काफी कम रहे।

मानकों में छूट से राहत की उम्मीद

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में गेहूं खरीद के मानकों में अस्थायी छूट देने का निर्णय लिया है।

अब पंजाब में 70 प्रतिशत तक चमक की कमी वाले गेहूं को स्वीकार किया जाएगा, जबकि सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 15 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। पहले यह सीमा मात्र 6 प्रतिशत थी। हालांकि, क्षतिग्रस्त दानों की अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत ही रखी गई है।

इस फैसले से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है और आने वाले दिनों में मंडियों में आवक बढ़ सकती है, जिससे खरीद में तेजी आएगी।

MSP और गेहूं खरीद लक्ष्य पर सवाल

सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। MSP में वृद्धि के बावजूद, यदि गेहूं खरीद प्रक्रिया इसी गति से चलती रही, तो निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में मौसम सामान्य रहा और मंडियों में व्यवस्थाएं सुधरीं, तो खरीद में तेजी संभव है।

वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि खरीद तंत्र की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। बेमौसम मौसम की घटनाएं अब कृषि क्षेत्र में नई सामान्य स्थिति बनती जा रही हैं, ऐसे में नीतिगत स्तर पर लचीलापन और तेज निर्णय लेने की आवश्यकता है।

सरकार द्वारा मानकों में दी गई छूट एक तात्कालिक समाधान है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से फसल सुरक्षा, भंडारण और खरीद प्रक्रियाओं को और मजबूत करना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

====

हमारे लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ से जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

ये भी पढ़ें…

Crude Oil Price Crash: होर्मुज खुलते ही तेल कीमतों में बड़ी गिरावट, 84 डॉलर पर आया WTI

साल 2026 में ‘सुपर अलनीनो’ का खतरा: रिकॉर्ड गर्मी और चरम मौसम की आशंका

सामान्य से कम मानसून का अनुमान; खरीफ उत्पादन और महंगाई का खतरा

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

संबंधित श्रेणी न्यूज़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची