[polylang_langswitcher]

IMD Monsoon Forecast 2026: सामान्य से कम मानसून का अनुमान; खरीफ उत्पादन और महंगाई का खतरा

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
Monsoon 2026

IMD Monsoon Forecast 2026: कमजोर मानसून का संकेत, कृषि और महंगाई पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान सामने आने के बाद कृषि और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 92% रहने की संभावना है, जो ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में आता है।

यह अनुमान ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई के दबाव का सामना कर रहा है, जिससे मानसून की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

IMD Monsoon Forecast 2026: कृषि उत्पादन पर सीधा असर

भारत की कृषि प्रणाली मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, खासकर खरीफ सीजन के लिए। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन का बड़ा हिस्सा इसी अवधि में होता है। ऐसे में बारिश में कमी का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।

IMD के मुताबिक, मानसून की कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत 87 सेमी से करीब 8% कम रह सकती है, हालांकि इसमें ±5% की त्रुटि संभव है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव उन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है जो वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं, विशेष रूप से मध्य और पश्चिम भारत।

निजी एजेंसी Skymet Weather ने भी इसी तरह का अनुमान जताते हुए कहा है कि मानसून LPA के करीब 94% रह सकता है। हालांकि जून में सामान्य के आसपास बारिश रहने की संभावना है, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच इसमें गिरावट देखी जा सकती है।

अलनीनो बना प्रमुख कारण

IMD Monsoon Forecast 2026IMD Monsoon Forecast 2026: कमजोर मानसून के पीछे सबसे बड़ा कारण El Niño को माना जा रहा है। यह जलवायु घटना प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि से जुड़ी होती है और ऐतिहासिक रूप से भारत में कमजोर मानसून से इसका गहरा संबंध रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जून के बाद अलनीनो परिस्थितियां मजबूत हो सकती हैं, जिसका असर मानसून के दूसरे हिस्से—अगस्त और सितंबर—में अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। पिछले अनुभव बताते हैं कि 1980 के बाद लगभग 70% अलनीनो वर्षों में भारत में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

खाद्य महंगाई का बढ़ता जोखिम

कम वर्षा का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सीधे तौर पर खाद्य कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है। दलहन और तिलहन जैसी फसलें वर्षा पर अधिक निर्भर होती हैं, और इनके उत्पादन में कमी से बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं।

स्थिति को और जटिल बनाता है पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेषकर Iran से जुड़े घटनाक्रम, जिसने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित किया है। इससे उर्वरक और ऊर्जा जैसे कृषि इनपुट महंगे हो गए हैं, जो किसानों की लागत बढ़ा सकते हैं।

किसानों के लिए दोहरी चुनौती

कम वर्षा और बढ़ती लागत का संयुक्त प्रभाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इससे बुवाई के फैसले प्रभावित होंगे, उत्पादन घट सकता है और कुल कृषि आय पर दबाव पड़ेगा।

हालांकि सरकार के पास धान जैसे प्रमुख अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे तत्काल संकट को टाला जा सकता है, लेकिन अन्य फसलों में गिरावट खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती है।

IMD Monsoon Forecast 2026: कुछ राहत की उम्मीद भी

हालांकि पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है। Indian Ocean Dipole (IOD) की संभावित सकारात्मक स्थिति मानसून के उत्तरार्ध में कुछ राहत दे सकती है। आमतौर पर सकारात्मक IOD भारत में बेहतर वर्षा से जुड़ा होता है, हालांकि इसका प्रभाव कितना होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना कठिन है।

IMD Monsoon Forecast 2026: नीति-निर्माताओं के लिए चुनौतीपूर्ण समय

कुल मिलाकर, कमजोर मानसून का यह पूर्वानुमान केवल मौसम से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह कृषि, महंगाई और आर्थिक स्थिरता से सीधे जुड़ा हुआ है। आने वाले महीनों में मानसून की वास्तविक स्थिति यह तय करेगी कि भारत इस संभावित संकट को कितनी प्रभावी तरीके से संभाल पाता है।

====

हमारे लेटेस्ट अपडेट्स के लिए ‘कृषि भूमि’ से जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45

ये भी पढ़ें…

हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी 35% बढ़ी: मानेसर हड़ताल के बाद सरकार का बड़ा फैसला

शेयर :

Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn
WhatsApp

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

ताज़ा न्यूज़

विज्ञापन

विशेष न्यूज़

Stay with us!

Subscribe to our newsletter and get notification to stay update.

राज्यों की सूची