नया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026: क्या बदलने जा रहा है?
नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्र सरकार ने देश के चीनी उद्योग में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है। यह बदलाव लगभग 60 वर्षों से लागू 1966 के कानून में संशोधन का संकेत देता है। उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव मांगे गए हैं।
इस नए ड्राफ्ट का उद्देश्य चीनी उद्योग को आधुनिक बनाना, किसानों के हितों की रक्षा करना और एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
नया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर: चीनी मिलों के बीच दूरी बढ़ाने का प्रस्ताव
नए ड्राफ्ट के तहत किसी भी नई चीनी मिल को स्थापित करने के लिए न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। इससे एक ही क्षेत्र में मिलों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होगी और गन्ने की उपलब्धता संतुलित रहेगी।
| प्रावधान | पुराना नियम | नया प्रस्ताव |
|---|---|---|
| न्यूनतम दूरी | 15 किमी | 25 किमी |
| बैंक गारंटी | नहीं | 2 करोड़ रुपये |
| उत्पादन शुरू करने की समय सीमा | अस्पष्ट | 5 वर्ष |
राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति से इस दूरी में बदलाव कर सकेंगी, लेकिन इसके लिए ठोस कारण बताने होंगे।
खांडसारी इकाइयों पर सख्ती
नया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर: ड्राफ्ट में पारंपरिक खांडसारी इकाइयों को भी कड़े नियमन के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। अब इन इकाइयों के लिए लाइसेंस अनिवार्य होगा और नियमित निरीक्षण किए जाएंगे।
गौरतलब है कि चीनी मिलों को गन्ना जुटाने में जो दिक्कतें आ रही हैं, उसके पीछे खांडसारी और गुड़ इकाइयों की बढ़ती खरीद एक बड़ी वजह मानी जा रही है। नए नियम इस असंतुलन को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं।
किसानों के भुगतान पर सख्त प्रावधान
गन्ना किसानों के लिए सबसे अहम बदलाव भुगतान व्यवस्था में देखने को मिलेगा। ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि:
- गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य होगा
- देरी होने पर 14–15% वार्षिक ब्याज देना होगा
यदि चीनी वर्ष के अंत तक भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित मिल को तीन महीने के भीतर पूरी राशि जिला कलेक्टर के पास जमा करनी होगी। यह व्यवस्था किसानों के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाई गई है, हालांकि अतीत में इसका प्रभावी क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा है।
एथेनॉल को मिलेगा प्रमुख उत्पाद का दर्जा
ड्राफ्ट में एक बड़ा बदलाव एथेनॉल को लेकर किया गया है। अब इसे चीनी मिलों का प्रमुख उत्पाद माना जाएगा। नए नियमों के अनुसार:
- 600 लीटर एथेनॉल उत्पादन = 1 टन चीनी के बराबर
- गन्ने के जूस, सिरप या मोलासेस से उत्पादन को मान्यता
- बगास, मोलासेस और प्रेस मड जैसे उप-उत्पादों को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा
यह कदम सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को गति देने में मदद करेगा और मिलों की आय के नए स्रोत खोलेगा।
शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर: क्यों महत्वपूर्ण है यह संशोधन?
शुगर सेक्टर में यह बदलाव कई स्तरों पर असर डालेगा:
- किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास
- चीनी मिलों और खांडसारी इकाइयों के बीच संतुलन
- एथेनॉल आधारित ऊर्जा नीति को बढ़ावा
- उद्योग में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का नया ढांचा
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि कई प्रावधान पुराने कानून से लिए गए हैं, लेकिन नए बदलावों का प्रभाव दीर्घकालिक होगा और इसके लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है।
यूपी चुनाव और गन्ना राजनीति
यह ड्राफ्ट ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों और चीनी उद्योग का राजनीतिक महत्व काफी अधिक है।
इस वर्ष राज्य में लगभग 63 लाख टन गन्ने की कमी दर्ज की गई है, जिससे यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है। ऐसे में यह नया ऑर्डर न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
कुलमिलाकर, शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026 देश के चीनी उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो यह किसानों, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र तीनों के लिए लाभकारी साबित होगा। आने वाले समय में हितधारकों के सुझावों के बाद इसमें और बदलाव संभव हैं, जिससे इसकी दिशा और स्पष्ट होगी।
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