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Dry Fruit Prices: दिवाली से पहले महंगे होंगे ड्राई फ्रूट, सप्लाई संकट से कीमतों में 30% तक उछाल की आशंका

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dry fruits price

नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): Dry Fruit Prices: इस साल दिवाली पर ड्राई फ्रूट्स खरीदना उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण भारत में बादाम, पिस्ता, खजूर समेत कई प्रमुख ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिवाली तक ड्राई फ्रूट्स के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।

भारत ड्राई फ्रूट्स की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में ईरान, अफगानिस्तान और इराक जैसे प्रमुख निर्यातक देशों से सप्लाई प्रभावित होने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। कारोबारियों के अनुसार इन देशों से आने वाली सप्लाई में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।

पश्चिम एशिया संकट से बिगड़ी सप्लाई चेन

Dry Fruit Prices: कमोडिटी ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक राजीव पबरेजा के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ड्राई फ्रूट व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बॉर्डर प्रतिबंध, बंदरगाहों पर बाधाएं और कार्गो मूवमेंट में देरी के कारण आयातकों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि ईरान और अफगानिस्तान जैसे देशों से आने वाले बादाम, पिस्ता और खजूर की आपूर्ति बाधित हुई है। इसके चलते बाजार में उपलब्धता कम हुई है और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

Dry Fruit Prices: शिपिंग लागत में रिकॉर्ड उछाल

ड्राई फ्रूट व्यापार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लॉजिस्टिक्स लागत है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, ईरान से माल ढुलाई की लागत में कई गुना वृद्धि हुई है। पहले जहां एक कंटेनर की शिपिंग लागत लगभग 500 डॉलर होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 15,000 डॉलर तक पहुंच गई है।

इतना ही नहीं, शिपमेंट के ट्रांजिट समय में भी भारी वृद्धि हुई है। पहले जो खेप 7 से 8 दिनों में भारत पहुंच जाती थी, अब उसे आने में 45 से 60 दिन तक लग रहे हैं। इससे आयातकों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

जुलाई से बढ़ सकती है कीमतों की रफ्तार

विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राई फ्रूट्स की कीमतें पहले ही 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। हालांकि जुलाई के मध्य से त्योहारी खरीदारी शुरू होने के साथ कीमतों में एक और 10 से 15 प्रतिशत की तेजी आ सकती है।

Dry Fruit Prices: यदि मौजूदा हालात बने रहे और दिवाली सीजन में मांग मजबूत रही, तो कुल बढ़ोतरी 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका सबसे अधिक असर बादाम, पिस्ता और खजूर जैसे आयात-निर्भर उत्पादों पर देखने को मिलेगा।

मजबूत डॉलर और कमजोर रुपया बढ़ा रहे दबाव

ड्राई फ्रूट आयातकों के लिए अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी चिंता का विषय बनी हुई है। चूंकि अधिकांश आयात डॉलर में होते हैं, इसलिए रुपये में कमजोरी आने पर आयात लागत और बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में रुपया और कमजोर होता है, तो ड्राई फ्रूट्स की खुदरा कीमतों (Dry Fruit Prices) में अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

बढ़ती कीमतों से मांग पर पड़ सकता है असर

भारत का ड्राई फ्रूट बाजार पिछले कुछ वर्षों से लगातार विस्तार कर रहा है और इसकी वार्षिक मांग में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। हालांकि इस वर्ष बढ़ती कीमतें मांग की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें एक निश्चित स्तर से ऊपर जाती हैं तो उपभोक्ता पारंपरिक ड्राई फ्रूट गिफ्ट पैक्स के बजाय अन्य विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे त्योहारी बिक्री पर भी असर पड़ सकता है।

Dry Fruit Prices
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प्रीमियम और हेल्थ फूड्स की मांग बढ़ी

पारंपरिक ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी के बावजूद प्रीमियम नट्स और हेल्थ फूड्स की मांग बढ़ती दिखाई दे रही है। खासकर युवा उपभोक्ताओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने के कारण कद्दू के बीज, पेकान नट्स, ब्राजील नट्स और एडामे जैसे उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई-प्रोटीन और न्यूट्रिशन से भरपूर उत्पादों की मांग आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है, जिससे ड्राई फ्रूट उद्योग में नए अवसर भी पैदा होंगे।

क्या करें उपभोक्ता?

त्योहारी सीजन में ड्राई फ्रूट्स खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह सही समय हो सकता है कि वे जल्द खरीदारी पर विचार करें। यदि सप्लाई संकट और आयात लागत का दबाव जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर ही कीमतें टिकी हुई हैं, लेकिन मांग बढ़ने के साथ स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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