नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): मानसून 2026 अपडेट: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के अनुसार 7 जून तक मानसून पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों और बंगाल की खाड़ी के बड़े क्षेत्र को कवर कर चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 3 से 4 दिनों के दौरान मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और कर्नाटक के कई हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।
हालांकि मानसूनी गतिविधियां बढ़ने के बावजूद उत्तर और पश्चिम भारत के कई राज्यों में फिलहाल लू का असर बना रहेगा। मौसम विभाग ने एक साथ भारी बारिश, तेज हवाओं, बिजली गिरने और हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी की है।
पूर्वोत्तर भारत में पूरी तरह सक्रिय हुआ मानसून
आईएमडी के मुताबिक मानसून नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और असम के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है। अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी मानसूनी बारिश शुरू हो गई है। अगले सात दिनों के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक वर्षा गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
विशेष रूप से असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 9 से 13 जून के बीच कई स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इससे निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
केरल और कर्नाटक में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी
दक्षिण भारत में मानसून का प्रभाव सबसे अधिक केरल और कर्नाटक में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने केरल और माहे में 10 से 13 जून तक भारी बारिश की संभावना जताई है।
तटीय कर्नाटक में 8 से 10 जून के दौरान अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है, जबकि राज्य के आंतरिक हिस्सों में 7 से 10 जून तक बहुत भारी बारिश का अनुमान है। तेज हवाओं और लगातार वर्षा के कारण स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उत्तर भारत में बदलेगा मौसम का मिजाज
उत्तर भारत के कई राज्यों में भी अगले कुछ दिनों में मौसम करवट ले सकता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।
दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में 11 से 13 जून के बीच बारिश हो सकती है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 10 से 13 जून तक वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। राजस्थान में 7 से 10 जून के दौरान धूलभरी आंधी और हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।
मध्य और पूर्वी भारत में भी सक्रिय रहेगा बारिश का दौर
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में 7 से 13 जून तक गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। कई स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी आगामी सप्ताह के दौरान बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। झारखंड में 10 से 13 जून के बीच वर्षा गतिविधियों में तेजी आ सकती है। ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।
कई राज्यों में अभी जारी रहेगी लू
मानसूनी बारिश के बावजूद देश के कई हिस्सों में गर्मी से तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार निम्न क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक लू की स्थिति बनी रह सकती है:
| राज्य/क्षेत्र | लू की संभावना |
|---|---|
| पश्चिमी राजस्थान | 7 से 11 जून |
| पंजाब | 8 से 11 जून |
| हरियाणा और दिल्ली | 8 से 11 जून |
| पश्चिमी उत्तर प्रदेश | 9 से 11 जून |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | 9 से 10 जून |
| मध्य प्रदेश | 10 से 11 जून |
| हिमाचल प्रदेश | 9 से 10 जून |
| तटीय आंध्र प्रदेश | 7 से 8 जून |
मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और बच्चों, बुजुर्गों तथा बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
बिजली गिरने और तेज हवाओं का खतरा
आईएमडी ने कई राज्यों में बिजली गिरने और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने मछुआरों को 7 से 12 जून तक प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से मौसम विभाग के नियमित अपडेट पर नजर रखने की अपील की है। जिन क्षेत्रों में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है, वहां बुवाई में जल्दबाजी न करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही फसल बुवाई, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन से जुड़े निर्णय लें। वहीं जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है, वहां खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है।
मानसून की रफ्तार को देखते हुए आने वाला सप्ताह कृषि और जल संसाधनों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि मौसम विभाग का अनुमान सही साबित होता है तो देश के कई हिस्सों में खेती-किसानी की गतिविधियों को नई गति मिल सकती है, जबकि लंबे समय से गर्मी झेल रहे क्षेत्रों को भी धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है।
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