नई दिल्ली (कृषि भूमि ब्यूरो): मॉनसून : भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की हालिया सुस्ती के बीच मौसम विज्ञान से जुड़ी ताजा जानकारी राहत भरी खबर लेकर आई है। विभिन्न वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि बंगाल की खाड़ी में 26 से 27 जून के आसपास वर्ष 2026 के मॉनसून सीजन का पहला महत्वपूर्ण निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) विकसित हो सकता है। यदि यह प्रणाली अनुमान के अनुसार बनती है, तो देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
मौसम मॉडलों ने दिए सकारात्मक संकेत
यूरोपीय मौसम मॉडल ECMWF AI सहित कई अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान प्रणालियां बंगाल की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश तट के आसपास एक निम्न दबाव क्षेत्र के विकास के संकेत दे रही हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली मॉनसून की प्रगति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
जून के शुरुआती और मध्य भाग में मॉनसून की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिसके कारण उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई। ऐसे में संभावित निम्न दबाव क्षेत्र को मॉनसून के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
इन राज्यों में बढ़ सकती है बारिश
मौजूदा अनुमानों के अनुसार निम्न दबाव क्षेत्र बनने के बाद यह पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में व्यापक वर्षा की संभावना बन सकती है।
संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्र:
| राज्य/क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| ओडिशा | भारी से बहुत भारी बारिश |
| आंध्र प्रदेश | कई जिलों में अच्छी वर्षा |
| छत्तीसगढ़ | व्यापक और तेज बारिश |
| पश्चिम बंगाल | मॉनसूनी गतिविधियों में वृद्धि |
| झारखंड | मध्यम से भारी वर्षा |
| बिहार | वर्षा की तीव्रता बढ़ सकती है |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | अच्छी मॉनसूनी बारिश |
| उत्तर प्रदेश | मॉनसून की प्रगति तेज हो सकती है |
विशेषज्ञों के अनुसार, सिस्टम के मजबूत होने की स्थिति में इसका असर मध्य प्रदेश, गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र तक भी पहुंच सकता है।
पश्चिमी तट पर भी बढ़ेगी सक्रियता
मौसम मॉडलों के अनुसार 22 से 23 जून के बीच अरब सागर से नमी की आपूर्ति बढ़ने के संकेत हैं। इसके परिणामस्वरूप कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी अगले सप्ताह के दौरान वर्षा की तीव्रता में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पश्चिमी घाट क्षेत्रों में भारी बारिश की घटनाएं भी दर्ज हो सकती हैं।

मॉनसून के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सिस्टम?
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव क्षेत्र भारतीय मॉनसून के प्रमुख प्रेरक तंत्रों में से एक माने जाते हैं। ये सिस्टम समुद्र से बड़ी मात्रा में नमी खींचकर देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाते हैं, जिससे व्यापक वर्षा होती है।
यदि 27 जून के आसपास प्रस्तावित यह सिस्टम विकसित होता है और मजबूत बना रहता है, तो यह न केवल पूर्वी भारत बल्कि मध्य और उत्तर भारत में भी मॉनसून की गति को बढ़ा सकता है। इससे वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों को राहत मिलने की संभावना रहेगी।
आगे क्या देखें?
हालांकि अभी इस संभावित सिस्टम के बनने में कुछ दिन शेष हैं और इसके मार्ग तथा तीव्रता में बदलाव संभव है, लेकिन वर्तमान संकेत मॉनसून प्रेमियों और किसानों के लिए उत्साहजनक माने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में मौसम एजेंसियों और आधिकारिक पूर्वानुमानों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल मौसम विशेषज्ञों की निगाहें बंगाल की खाड़ी पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह संभावित निम्न दबाव क्षेत्र जून के अंत में भारतीय मॉनसून को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है और देशभर में बारिश की गतिविधियों को तेज करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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